बच्चों को सहानुभूति सिखाने के 10 तरीके -10 ways to teach empathy to kids

बच्चों को सहानुभूति सिखाने के 10 तरीके -10 ways to teach empathy to kids



नमस्कार दोस्तों !!!

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं, हमे अपनी दिनचर्या मे प्रति दिन कई व्यक्तियों के साथ मिलना जुलना रहना पड़ता है; चाहे घर हो या दफ्तर, विद्यालय हो या कॉलेज, बाजार मे हो या कोई सम्मलेन; प्रत्येक जगह हम लोगो से घिरे रहते हैं| और जहाँ लोग होते है वहाँ उनके विभिन्य प्रकार की भावनायें भी होती है; जिससे चाहे चाहे हमे भी निपटना तो पड़ता ही हैं | कुछ समय हँसी ख़ुशी और मस्ती के होते है तो कई दफ़ा उन्हें हमारी सहानुभूति, हमदर्दी एवं संवेदना कि जरुरत पड़ती हैं; परन्तु अगर आपने गौर किया हो तो कई व्यक्ति सहानुभूति देने मे असमर्थ महसूस करते हैं | ऐसा नहीं है की वह अभिमानी हैं या असंवदेनशील हैं; मगर ऐसा हो सकता है की वे चाह कर भी अपनी सहानुभूति, हमदर्दी एवं संवेदना को व्यक्त करने में सक्षम ना हो |

अब समझते है की आखिर क्या कारण है की कुछ व्यक्ति दुसरो के दुःख मैं तुरंत उनके होकर उन्हें भावनात्मक सहारा देने मे सक्षम होते है; परन्तु कुछ व्यक्ति संकोच कर जाते है | दरअसल इसकी शुरुआत जीवन के शुरुआती दौर मे ही हो जाती है सहानुभूति की एक अच्छी नींव बच्चों मे माता-पिता ही डालते हैं |

सामान्य दिनचर्या मे ऐसा क्या करें जिससे बच्चों मे सहानुभूति, हमदर्दी एवं संवेदना का भाव उत्त्पन हों एवं यह उनके व्यक्तित्व कि एक महत्वपूर्ण विशेषता बन जायें ?

"मनुष्य का महान उपहार यह है कि हमारे पास सहानुभूति की शक्ति है, हम सभी एक दूसरे के साथ एक रहस्यमय संबंध से जुड़े हैं।" - मेरिल स्ट्रीप

"The great gift of man is that we have the power of sympathy, we are all connected with a mysterious connection with each other." - Meryl Streep

ऐसे 10 बहुत ही सरल तरीकों के बारे मे आज यहाँ विश्लेषण करेंगे

1)    एक उदाहरण बने - बच्चे माता पिता का ही अनुसरण करते हैं, यदि माता पिता बच्चों को उनकी गलती पर सहानुभूति से समझायेंगे तो वह भी धीरे-धीरे इस बात को समझ जायेंगे की उनको भी सहानुभूति दिखानी हैं | जब बच्चे आपको तनावपूर्ण परिस्थिति मे भी संभाला हुआ देखते है तो वह अपने आप ही सहानुभूति के महत्व को समझने लगते हैं | बच्चों के समक्ष सहानुभूति के प्रत्यक्ष उदाहरण बनने की कोशिश करें |

2)    भावनाओं के बारे में बात करें - बच्चों को स्वयं की भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना नहीं आता; यहाँ माता-पिता को उनकी भूमिका निभाने की जरूरत होती है| अपने बच्चों से बात करें उनको कैसा महसूस हो रहा है उसके बारे मे जाने| जब भी उनको भावुक या गुस्सा होते हुए देखे हो सहानुभूति से उनसे बात करें ताकि वह अपनी भावनाओं को आपसे बाटे| उनको कभी अकेला ना छोड़े और ना हीं उनकी भावनाओं का मज़ाक उड़ाए नहीं तो वह स्वयं की भावनाओं को दबाना सिख जाते हैं और आगे चल कर उसको सहानुभूति प्रकट करनी नहीं आती |


3)    सहानुभूति की सराहना करे - आप जब भी अपने बच्चों को दूसरों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए देखे तुरंत उसी समय उनकी सबके सामने उसकी सराहना करें | सहानुभूति किसी के भी प्रति हो सकती हैं जैसे पशु के प्रति, फूल पौधों के प्रति, मित्रो के प्रति, बुज़ुर्गो के प्रति इत्यादि ... | उन्हें सराहने और प्रोत्साहित करने का छोटे से छोटा मौका भी ना छोड़े|


4)    भावनाओं को बढ़ावा दें - बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने दे, उनको धैर्य से सुने समझे एवं उनकी सराहना भी करें| उन्हें अपने विचारो और समझ को सही प्रकार व्यक्त करने पर उनकी तारीफ करें; बच्चों को क्या सही है ये प्रोत्साहन कर आसानी से समझाया जा सकता हैं | इससे वह भावनात्मक रूप से मजबूत बनेंगे एवं उनमे सहानुभूति, हमदर्दी एवं संवेदना का विकास होगा |


5)   सुनने की कला - किसी के प्रति सहानुभूति दिखाने का सबसे अच्छा तरीका हैं उसको सुनना | हमे स्वयं भी अच्छा महसूस होता है जब हमारे विचारो को कोई सुने | बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा महसूस होती हैं एवं वह अपने आप को ठीक से समझ और भावनाओं को ठीक से व्यक्त कर पाते हैं |

6)   नियमित तौर पर एक दूसरे की प्रशंसा करें - घर हो या बहार हमे सदैव सहानुभूति से ही चीज़ो को संभालना आना चाहिए, किसी की तारीफ करने मे कतराना नहीं चाहिए | उदाहरण - बच्चों के शिक्षकों की तारीफ, बहार अगर आपकी किसी ने मदद की तो उसकी तारीफ, घर मे किसी ने हाथ बंटाया तो उसकी तारीफ इत्यादि..| बच्चों मे ये समझ उत्पन्न होती हैं की दुसरो हमारे प्रति सहानुभूति का व्यव्हार कर रहे हैं और वह भी दुसरो को मदद करने को प्राथमिकता देते हैं |

7)   जरूरतमंदों की मदद करना सिखाये-सबका जीवन एक समान सुख सुविधा से भरा नहीं होता; हमारे चारो तरफ कई ऐसे जरुरतमंद इंसान है जिनको हमारी मदद और सहारे की जरुरत होती हैं | बच्चों को जरुरतमंदो के प्रति दयालुता के कार्यो मे अपने साथ लेकर जाये उनके हाथो से भी जरुरतमंदो को कुछ सामान बटवायें एवं मदद करने के लिए प्रेरित करें|


8)   कहानियों के माध्यम से सहानुभूति सिखाना - बच्चों के जीवन मे कहानियों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता हैं, उनके पास बहुत अच्छी कल्पना शक्ति होती हैं | दुसरो के प्रति सहानुभूति को प्रेरित करने वाली कहानियाँ सुनाये एवं उसके बारे मे बात करें | कहानियों के द्वारा हम बहुत ही छोटे बच्चे मे भी धीरे-धीरे संवेदना एवं सहानुभूति का भाव उत्त्पन कर सकते हैं |


9)   समन्वय और घर के काम में एक दूसरे की मदद करते हैं - अपने देखा होगा दैनिक कार्यो मे घर का कोई कोई सदस्य बहुत व्यस्त रहता हैं; अगर हम एक दूसरे का हाथ बताये और बच्चों को भी ऐसा करने के लये प्रेरित करें तो उनके मन मे संवेदना जागृत होगी | छोटे-छोटे कामों मे उनकी मदद ले एवं कार्य पूरा करदेने पर उनको सराहें और धन्यवाद् करें |


10) मतभेद होने के बाद, भावनाओं को साझा करें - हम सभी इंसानो के विचार अलग अलग होते हैं; जिस वज़ह से हममे एक साथ रहते हुए भी कई बार मदभेद हो जाते हैं| मतभेद होना गलत नहीं हैं पर उसके बाद आप किस प्रकार परिस्थिति पर काबू पा रहे है वह महत्वपूर्ण हैं | मतभेदों को जल्द से जल्द सुलझाए और एक दूसरे से अपनी भावनाओं को बाटें; इस प्रकार बच्चों को सिख मिलेगी की हमारे विचार अलग होते हुए भी हम एक दूसरे के प्रति सहानुभूति रखते हैं एवं दुसरो के विचार और भावनाओं की कदर करते हैं |


"सहानुभूति - जो दूसरे की आँखों से देखे, दूसरे के कान के सुने, और दूसरे के दिल से महसूस करें।" - अल्फ्रेड एडलर

“Empathy is seeing with the eyes of another, listening with the ears of another, and feeling with the heart of another.” - Alfred Adler

सहानुभूति बच्चों को जीवन मे सफल एवं सुलझा हुआ इंसान बनती हैं | हम सभी का   सहानुभूति सीखाने का तरीका अलग हो सकता हैं पर ध्यान रखे बच्चों के आस-पास के लोगो एवं परिवार से ही उसको सहानुभूति का पाठ मिलता हैं; जो उनके जीवन मे  सदैव के लिए सम्मलित हो जाता हैं |


आज इन विचारो के साथ आपसे विदा लेना चाहूँगी |

DeepTea

Comments

  1. Good thoughts, kids r so naughty its very difficult to every time show empathy

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  2. Totally agree..we will have to learn and show Empathy before we teach our kids.

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