जीवन में विषाक्त लोगों से निपटने के 7 तरीके - 7 Ways to Deal with Toxic People in Life
जीवन में विषाक्त लोगों से निपटने के 7 तरीके - 7 Ways to Deal with Toxic People in Life
नमस्कार दोस्तों !!!
आप के जीवन मे कई ऐसे लोग होंगे जिनको आप कितना भी खुश करने की कोशिश कर लो, कितना भी उनके हिसाब से चल लो उनको कुछ भी नहीं भाता; और इनका यह व्यहार सिर्फ आपके साथ नहीं बल्कि आसपास के सभी लोगो के साथ भी ऐसा ही रहता हैं | किसी भी बात पर झड़प कर लेना, बात का बतंगड़ बना देना, किसी की भावनाओं की कोई कदर न करना, हर बात पर दुसरों को दोषी ठहरा देना, ऐसा कुछ चरित्र रखते है यह विषक्त लोग; हो सकता की ऐसे विषाक्त चरित्र के पीछे उनका कोई कड़वा अतीत हो या उसके कुछ बहुत ख़राब अनुभव; परन्तु सवाल यह है की आप स्वयं को ऐसे व्यक्तियों के दुर्व्यहार से कैसे बचाएँ ?
विषाक्त व्यक्ति कोई भी हो सकते हैं आपके करीबी-आपके दोस्त-आपके रिस्तेदार-आपके पडोसी-आपके दफतर मे काम करने वाले सहकर्मी या आपका Boss, इनसे बचने का सबसे अच्छा उपाय है की आप इनको अपने जीवन से निकल दे; परन्तु ऐसा करना वास्तव में कई बार संभव नहीं होता| आपको इनके साथ ही जीवन काटना होता हैं एवं इनको सहते हुए ही आगे बढ़ना होता हैं और तो और इन चक्करों मे आप अपने आपको खोने लगते हैं या इनकी विषाक्ता का प्रभाव स्वयं आपके व्यव्हार मे भी दिखने लगता हैं |
मनुष्य को प्यार सद्भावना और सम्मान की सबसे ज्यादा जरुरत होती हैं, परन्तु जब कोई बार-बार आपके इस जरुरत पर उल्टा वार करता हैं और आपको उनके द्वेष, जलन, गुस्से, निराशा, नकारात्मकता और असभ्य टिप्पणियों का सामना करना पड़ता हैं तो आपका स्वाभिमान डगमगाने लगता हैं | ऐसे मे आप स्वयं को लाचार और भविष्य को अँधेरे मे देखने लगते हैं; परन्तु क्या इनसे बचे रहने का कोई दूसरा तरीका नहीं हैं ? क्या हमेशा आपको अपना आत्मसम्मान खोना पड़ेगा और इनके विषाक्त व्यव्हार को सहते रहना पड़ेगा ?
आपको यह तो समझ आ ही गया होगा की यह विषाक्त व्यक्ति कौन होते हैं और इनको नियंत्रण मे करना भी संभव नहीं हैं, तो अब सवाल यह है की कैसे आप स्वयं को इनसे बचा सकते हैं ?
आईये जाने 7 तरीके जो थोड़े मुश्किल तो हैं पर आपको इन विषाक्त व्यक्तियों से बचा सकते हैं - 7 Ways to Deal with Toxic People in Life -
1) विषय बदलें - Change the Subject
जब भी ऐसे लोगो से आपका सामान हो और माहौल गरम होने लगे तो कोशिश करे विषय बदलने की; याद रखे आप ऐसे लोगो की मानसिकता और प्रकृति बदलने के चक्कर मे ना पड़े नहीं तो बात का बवाल बन जायेगा और सारे के सारे दोष आप पर ही लग जायेंगे | उनका ध्यान उस उलझे हुए विषय से हटाने की कोशिश करें |
2) बातचीत से खुद को काटें - Cut yourself out from the conversation
ऐसे लोगो से पहले तो बात करने से बचे और अगर बात शुरू हो जाये और स्थिति नियंत्रण से बाहर निकलती दिखाई देने लगे तो तुरंत कोई अच्छा बहाना सोच कर वहाँ से निकलने की कोशिश करें | कुछ अत्यावश्यक काम बता कर कोशिश करना बेहतर होगा ना की कुछ अनावश्यक; यह बातचीत में एक अंतर पैदा करेगा और उन्हें तुरंत क्रोध को छोड़ने में भी मदद करेगा और सबसे महत्वपूर्ण है कि आप उनके कठोर रवैये से भी बच जाएंगे |
3) बीच में सकारात्मकता लाओ - Bring positivity in between
कभी-कभी आपको पहले से पता चल जाता है कि बातचीत कुछ सेकंडों / मिनटों में बहुत कठिन होने वाली है; तुरंत उसी समय बातचीत में थोड़ी सकारात्मकता लाने की कोशिश करें; इसके लिए आप किसी की मदद ले सकते हैं जैसे - अपने सहकर्मी को बातचीत के बीच मे हिस्सा लेने को कहे या स्वयं उनको शांत करने वाले शब्दों का प्रयोग करें | जगह और स्थिति के हिसाब से बात को सम्भालने की कोशिश करें ताकि समय रहते सब नियंत्रित हो जाये और आप भी विषाक्त व्यक्ति के प्रभाव से बचा सके |
4) एक रेखा खींचिए - Draw a line
विषाक्त व्यक्ति दूसरों पर दोष डालने की कोशिश करते हैं, आपके शांत रहने का फायदा उठाते हैं; कोशिश करनी चाहिए की आप उनसे बात-चीत करने से बचे और किसी भी गरमा गर्मी मे ना पड़े परन्तु अगर स्थिति हाँथ से निकलने लगे तो आपको उन्हें उनकी सीमा याद दिलानी चाहिए | एक रेखा खींचिए ताकि आगे कभी ऐसा स्थिति आने पर चीज़े इतनी ना बिगड़े; इसके लिए आपको उन्हें उनके दायरे मे रहने के लिए बताना होगा |
5) करुणा दिखाओ - Show Compassion
जैसे आपने पहले भी पढ़ा विषाक्त व्यक्ति कई बार अपनी पसंद से विषाक्त नहीं बनता परन्तु कई बार ज़िन्दगी की परेशानियाँ उन्हें इस प्रकृति का इंसान बना देती हैं | सभी का जीवन अत्यधिक खुशहाल और सम्मपन नहीं होता और अत्यधिक मानसिक-शरीर कष्ट सहते-सहते वह बड़े ही निर्जीव और कटु स्वाभाव के हो जाते हैं; ऐसे मे उन्हें दूसरों से थोड़ी समझदारी और अपनेपन की जरुरत होती हैं | आप ऐसे इंसान को भावनात्मक सहारा और अपनी करुणा के द्वारा सँभालने का प्रयत्न करें; संभावना है की वह स्वयं के प्रयास और आपके सहयोग से अपने आपको संभल पाएंगे और चीज़े बेहतर हो जाएगी |
6) दिल पर ना लें - Don’t take it on heart
कभी-कभी हमें स्थिति को संभालने के लिए उससे थोड़े हलके मे भी लेना चाहिए; सभी चीजों पर अगर आप बहुत सोचने, सभी स्थिति पर अगर आप अत्यधिक प्रतिक्रिया देने लगेंगे तो आपमें और विषाक्त व्यक्ति मे क्या अंतर रह जायेगा एवं आप स्वयं का मानसिक संतुलन भी खो सकते हैं | सभी बातो को और सभी स्थिति को दिल पर ना ले और कोशिश करते रहे स्वयं को विषाक्ता से बचाये रखने की |
7) अपने प्रेरणा कारकों को प्रभारी रखें - Keep your Motivation factors Incharge
जैसे सभी नकारात्मकताओं से उभरने मे सकारात्मकता प्रभावशाली होती हैं, वैसे ही विषाक्त व्यक्तियों के व्यवहार से उभरने के लिया आपको अपनी प्रेरणा कारकों का सहारा लेना पड़ेगा | कभी भी स्वयं के मन को किसी विषाक्त व्यक्ति के व्यवहार के कारण दुखी न होने दे; अपने प्रेरक कारकों को लाएं और जितनी जल्दी हो सके अपने आप को Re-charge करें |
Letting “Toxic People Go” is Not an act of Cruelty; Its an act of “Self-Care”.
DeepTea



Absolutely right
ReplyDeleteThank you 🙏
DeleteVery Good Topic.👍. I keep myself away from such type of negative ppl. 🙂
ReplyDeleteविषाक्त व्यक्ति कोई भी हो सकते हैं आपके करीबी-आपके दोस्त-आपके रिस्तेदार-आपके पडोसी-आपके दफतर मे काम करने वाले सहकर्मी या आपका Boss, इनसे बचने का सबसे अच्छा उपाय है की आप इनको अपने जीवन से निकल दे; परन्तु ऐसा करना वास्तव में कई बार संभव नहीं होता| आपको इनके साथ ही जीवन काटना होता हैं एवं इनको सहते हुए ही आगे बढ़ना होता हैं और तो और इन चक्करों मे आप अपने आपको खोने लग 😪
ReplyDeleteVery well-written! Loved all the points particularly the one on self-withdrawal for caring your own self. It’s true. It’s not easy to change others but bringing positivity in yourself helps protect your own sanity.
ReplyDeleteWonderfully written and described.. I agree that it's better to keep yourself away from negative people .
ReplyDeleteThank you 🙏
DeleteImportant topic handled so well😊👍
ReplyDeleteThank you 🙏
Deleteबहुत ही अच्छा लिखा आपने|
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
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