अपने बच्चे को लोगों को खुश करने वाला बनने से कैसे रोके - How to Prevent your Child From Becoming a People Pleaser

अपने बच्चे को लोगों को खुश करने वाला बनने से कैसे रोके - How to Prevent your Child From Becoming a People Pleaser

नमस्कार दोस्तों !!!

आपको जरूर ख़ुशी मिलती होगी जब आपका बच्चा आपकी सभी बातें मानता होगा और दूसरे भी इस बात के लिए उसकी सराहना करते होंगे। यह किस माता-पिता की इच्छा नहीं होती की उसका बच्चा उनकी बातें माने शायद हम सभी इसको अनुशासन का नाम देते हैं। बच्चों को अनुशासन सीखना गलत नहीं हैं पर यह कहाँ से सही हैं की उनको आपकी हर बात माननी ही पड़ेगी; इच्छा हो या नहीं क्यूंकि दूसरों को अच्छा लगेगा इसलिए उनको वह कार्य करना ही पड़ता हैं।

ये किसी किताब मे नहीं लिखा की बच्चे जब अपनी पसंद और अपनी मर्ज़ी से कुछ करें तो वह सही हो ही नहीं सकता, यह समझना तो सिर्फ बड़ों का अपनी बात मनवाने का तरीका हैं अब चाहे वह प्यार के कारण हो या डर के कारण। अगर आपको बच्चों को आत्मनिर्भर और स्वयं निर्णय लेने वाला व्यक्ति बनाना है तो इसकी नीव आपको आज से ही अपने बच्चों मे डालनी पड़ेगी।

आईये पहले समझने की कोशिश करें की हम सभी को वह बच्चे या व्यक्ति क्यों अच्छा लगता हैं जो दूसरों को खुश रखना जनता हैं -

1 ) वह सभी के साथ और किसी भी माहौल मे समायोजित हो जाते हैं।

2) वह दूसरों की जरूरत को अपने से पहले रखते हैं।

3) वह दूसरे की ख़ुशी मे खुश होना जानते हैं।

अब चर्चा करते हैं की आप कैसे अपने बच्चों को लोगों को खुश करने वाला बनने से रोके - Now let's discuss how to stop your children from becoming a People Pleaser

1)     स्वयं एक उदाहरण बने - Be an example

हम स्वयं अपने बच्चों के लिए एक उदाहरण हैं, जब आप स्वयं ही सभी की बात को स्वीकार करते है किसी की भी बात के लिए ना करना नहीं जानते; तो कैसे आप अपने बच्चों को ऐसा करने से रोक पाएँगे। पहले आप स्वयं को सुधारे और लोगो की ख़ुशी से ज्यादा आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं उसका फैसला लें। जब आपके बच्चे आपको अपना निर्णय लेते हुए देखेंगे तो वह भी आपका अनुसरण करेंगे।

Your Child Will Follow Your Example, Not Your Advice

2)     उन्हें सिखाये की उन्हें अपनी भलाई के लिए काम करना हैं - Teach them that they have to do things for their own good

आप बच्चों को यह तो सिखाते है की सबके साथ मिलकर रहे, सबकी बात माने, पर स्वयं की भलाई के बारे मे सीखाने को प्राथमिकता नहीं देते। सभी चीजों के साथ उनको अपनी भलाई के बारे मे भी सोचना आना चाहिए इस बात का उनको शुरु से ज्ञान दे। ज़िन्दगी की दौड़ मे उन्हें स्वयं को ही पहले देखना है तभी वह अपने प्रियजनों को संभाल पाएंगे।

3)     जो भी कर लो, कुछ लोग तुम्हे कभी पसंद नहीं करेंगे - Whatever you do, some people will never like you

अपने बच्चों को ये बताते रहे की दुनिया मे ऐसे कई लोग उनको मिलेंगे जिनके लिए वह चाहे कितना भी कर ले पर वह उनको पूरी तरह कभी पसंद नहीं करेंगे। उन्हें समझाए लोगों को खुश करने के लिए काम करने की जगह अपने काम को पूरी श्रद्धा और लगन से करना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि काम बेहतरीन होगा तो उनकी प्रगति को कोई रोक नहीं सकता।

4)     उनके प्रयासों के लिए उनकी प्रशंसा करें - Praise them for their efforts

आपने देखा होगा बच्चे कुछ काम अपने आप आपको देख-देख कर करने लगते हैं; जैसे खाना बनाते समय आपकी मदद करना, घर की साफ़ सफाई मे हाथ बताना, खरीदारी करते वक़्त आपको सामान याद दिलाना इत्यादि.... आपको याद से उनके इन छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करनी चाहिए; ये काम वह आपसे बिना पूछे जरूर कर रहे है पर इस तरह से ही उनके मनोबल और आत्मविश्वास मे बढ़ोतरी होती हैं एवं वह स्वयं निर्णय लेना सीखते हैं।

A simple “Well Done” can go a long way

5) वे जैसे भी हैं उन्हें वैसे ही प्यार दे और स्वीकार करें - Accept and love them as they are

हर माता पिता को अपने बच्चों से प्यार होता हैं और इसको कोई अस्वीकार नहीं कर सकता; परन्तु कभी-कभी यह प्यार इतना ज्यादा उफान ले लेता है की आपको पता ही नहीं चलता और आप अपने बच्चे को सबसे बेहतर बनाने की दौड़ मे उसका अस्तित्व ही बदलने लगते हैं। हमेशा याद रखे की आपके बच्चे मे दूसरों से कुछ अलग हैं; अगर वह भी सभी की तरह दिखने या करने लगेगा तो वह अनोखा कैसे रहेगा। वह जैसे है उनको वैसे ही अपनाये और अपना सारा प्यार दे एवं उनकी अद्भुतता को सराहे।

Be yourself.  Everyone else is already taken. – Oscar Wilde

6)     उन्हें समझाएं कि उनसे कहाँ गलती हो गयी नाकि उनपर अपना निर्णय लागू करें - Explain them were they went wrong in place of forcing your decision

बच्चे सभी काम सही नहीं करते तो उस वक़्त उनको समझाना और संभालना माता-पिता का काम होता हैं; अगर उस वक़्त आप उन पर अपनी राय और अपना निर्णय लागू करने लगेंगे तो बात बिगड़ सकती है और ऐसे मे बच्चे अपना स्वाभिमान भी खोने लगते हैं। उनकी गलती होने पर दुबारा सोचने का मौका दे और आगे बढ़ना सिखाये।

आज इसी के साथ आपसे विदा लेती हूँ |

DeepTea

 

 

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