क्यों आपको अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करना बंद करना चाहिए - Why you Should "Stop Comparing your Child with Others"

क्यों आपको अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करना बंद करना चाहिए - Why you should - "Stop Comparing your Child with Others"


हम सभी अपने बच्चों को बढ़ता हुआ और जीवन की ऊँचाईओं को छूटा हुआ देखना चाहते हैं; और इसके लिए माता-पिता जी जान लगाते हैं ताकि उनके बच्चे की प्रगति मे कोई बाधा ना आये। उनको उत्साहित करने का पूरा प्रयत्न भी करते रहते हैं; परन्तु कब ये प्रयत्न सकारात्मक से नकारात्मक हो जाता हैं इसका अंदाजा ही नहीं लगा पाते।

किसी की सराहना करना उनकी उपलब्धियों की चर्चा करना बहुत अच्छी बात हैं क्यूंकि इससे सभी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं; परन्तु सदैव अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करते रहना यह कहाँ से ठीक हैं ?

Why Do Parents Compare Their Child to Others?

इंसान एक सामाजिक प्राणी है और लोगों को देख कर सीखता और उनका अनुसरण करता हैं। जब माता पिता अपने आस-पास के दूसरे बच्चों को आगे बढ़ता देखते हैं तो उन्हें अपने बच्चों की उन्नति की चिंता सताती हैं और वह जाने अनजाने अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करने लग जाते हैं।

“Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid.” 

बच्चे के जन्म लेने से उसके व्यस्क होने के बाद भी माता-पिता की तुलना खत्म नहीं होती; आपकी आम दिनचर्या मे सुने हुए कुछ उद्धरण -

1.   उनका बच्चा कितना हष्ट-पुष्ट हो रहा है, पर हमारा बच्चा तो सूखता ही जा रहा हैं।

2.   क्यों तुम्हारे Maths मे कम अंक आये, देखो अपने दोस्त को उसके सब विषय मे पूरे marks हैं।

3.   देखो तुम्हारी दोस्त को कितने अच्छे से भाषण दिया उसने मंच पर, और एक तुम हो डरते ही रहते हो।

4.   उनका बेटा तो CA बन गया, तुम कोशिश करते तो तुम भी CA बन जाते।

5.   क्यों तुम बाहर पढ़ने जाना चाहते हो ? यहाँ से पढ़ कर बच्चों की अच्छी Gov. Job लग जाती हैं।

6.   इस उम्र मे हमारी शादी हो गयी थी और तुमको तो रोटी बनानी भी नहीं आती।

7.   आज कल बच्चों को all-rounder होने चाहिए, हमारा बच्चा सिर्फ पढता ही रहता है।

8.   मेरे सब दोस्तों के बच्चों ने Science ली है, एक मेरा ही बच्चा Commerce ले कर बैठ गया।

9.   हमारे परिवार में किसी ने उलटे हाथ से नहीं लिखा, ये उल्टा ही पैदा हुआ हैं।

What are the Bad effects of comparison on your kids

जब आप लगातार अपने बच्चे को दूसरों की उपलब्धि और प्रगति के सामने छोटा दिखाने की कोशिश करते है तो जाने अनजाने आप उनके अंदर जीवन के प्रति उम्मीद और उनकी आशा को तोड़ने लगते हैं। आईये समझे तुलना करने के कुछ अनदेखे दुष्प्रभावों को -

    1.   बच्चे मे ईर्ष्या का भाव पैदा होता हैं - Feelings of jealousy arise in the child

    2.   माँ-पिता से रिश्ते मे दरार आती हैं – Issues in Parent-child relationship

    3.   भाई-बहन मे द्वेष का नज़रिए बन जाता हैं - Siblings are born out of malice

    4.   तुलना करने से बच्चे का आत्मविश्वास बाधित होता हैं - The child's confidence is                     hampered by the comparison

    5.   निर्णय लेने की शक्ति पर प्रभाव पड़ता हैं - Decision making power gets affected

    6.   हमेशा घबराहट और असमंजस मे रहते हैं – Always nervous and confused

    7.   वे सामाजिक होने से बचते हैं - They avoid being social

    8.   खुद की सराहना नहीं करत पाते – They don’t appreciate themselves

Points to remind yourself before comparing your kids -

1)     हर बच्चा अद्वितीय है - Every child is unique

जैसे हर रंग समान नहीं होता, हर फूल एक सा नहीं होता वैसे ही हर बच्चा अलग होता हैं। ऐसा कैसा संभव है की सभी बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या का CA बन जाये। ध्यान रहे आपका बच्चा भी सबसे अलग हैं; और वह कुछ अलग ही प्राप्त करेगा

2)     हर बच्चे की सीखने की अपनी गति होती है - Every child has its own pace to learn

किसी बच्चे को एक बार पढ़ते ही याद हो जाता हैं वही किसी को कुछ याद ही नहीं होता; क्यूंकि हर बच्चे की अपनी अलग सीखने की गति होती हैं।  कुछ बच्चों को गणित जल्दी समझ आती है और कुछ को इसके लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती हैं; हर एक बच्चा अपने मे अलग सिखने की गति रखता हैं। आप यह सोचना बंद करें की सभी एक सामान एक ही गति से ही जीवन ही दौड़ पूरी करें; उनको समय दे और मेहनत करने के लिए प्रेरित करें।

3)     हर बच्चे की अपनी पसंद होती है - Every child has its own choice

सभी बच्चों की अपनी दिलचस्पी होती हैं; किसी को cycling करना पसंद है तो किसी को घर मे बैठ कर chess खेला, किसी को किताबे पढ़ना पसंद है तो कुछ की दिलचस्पी gardening मे, कुछ खाना बनाने मे पूरी लगन से लग जाते हैं तो कुछ बहार के काम को बखूबी निभाते हैं। आपको अपने बच्चे की पसंद को समझ कर उनको प्रोत्साहित करना होगा।

4) शिक्षा ही केवल एक चीज नहीं है - Education is not the only thing to do

आप स्वयं के बचपन के बारे मे सोच कर बताये की ऐसी कौन सी चीज़ है जिसके लिए सबसे ज्यादा तुलना की जाती थीं ? मुझे लगता है सबका जवाब होगा पढ़ाई।

क्यों माता-पिता सिर्फ और सिर्फ बच्चे की क्षमताओं को उनके पढ़ने और उनके अंको से जोड़ते हैं, क्यों उनके नया सोचने के तरीकों कि सराहना नहीं की जाती, उनके शारीरिक क्षमता को क्यों दूसरा स्थान मिलता हैं। अपने बच्चे की क्षमताओं को सिर्फ शिक्षा से ना आंके; आज कई ऐसे प्रोफेशन है जहाँ उनकी रचनात्मकता उनकी degree से ज्यादा महत्वपूर्ण है जैसे Photography, Fashion designing, Writer, Animator, Copy writer इत्यादि।

5)     बच्चे को आपके प्यार की जरूरत है; तुलना की नहीं - Child needs your love and support not comparison

बच्चे को आपके रोज़ के तुलना वाले शब्दों से ज्यादा आपके सद्भावना, आपकी प्रशंसा एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता होती हैं। आप ध्यान रखे आपके सभी शब्दों का बच्चों के भविष्य पर बहुत असर पड़ता हैं; बच्चे आपसे सदैव थोड़ी सहानुभूति और प्यार चाहते हैं।

6)     दूसरों की तुलना ना करें, सराहना करें - Don’t compare, appreciate others

बच्चों के सामने दूसरों की उपलब्धियों की सराहना करें, जिससे बच्चों मे भी कुछ प्राप्त करने कि जिज्ञासा उत्त्पन होगी। तुलना बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, वही दूसरों की सराहना सकारात्मक परिणाम दे सकता हैं।

7) यथार्थवादी अपेक्षा निर्धारित करें - Set realistic expectations

बच्चों से उम्मीद से ज्यादा उम्मीद करने से उन पर भी बेवजह का दबाव बनता है और आप को भी दुःख होता हैं; इससे बेहतर है आपके बच्चे से हो सके ऐसी उम्मीद रखे और उसको भी मानसिक तौर पर बेकार के दबाव से बचाये।


कोई भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं होता, सभी मे कोई ना कोई कमी जरूर होती हैं। बच्चों की कमी को अगर आप सारे वक़्त उन्हें बताते रहेंगे तो वह भी सिर्फ उनकी कमियों के विचार मे ही अपनी सारी शक्तियाँ गंवा देंगे। तुलना करने की जगह अगर आप उनके साथ मिल कर उनकी कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे एवं उनकी खूबियों को और भी बेहतर बनाने मे उनकी मदद करेंगे तो बच्चे भविष्य मे सत प्रतिशत एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप मे उभरेंगे।

“Don’t compare your child to others. There’s no comparison between the sun and the moon. They shine when it’s their time.”

आज इसी के साथ आपसे अनुमति लेना चाहूंगी |

DeepTea

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