8 चीजें जिनके लिए आपको अपने बच्चों को कभी मजबूर नहीं करना चाहिए - 8 things for which you should never force your kids
8 चीजें जिनके लिए आपको अपने बच्चों को कभी मजबूर नहीं करना चाहिए - 8 things for which you should never force your kids
“Don't force your children into your ways, for they were created for a time different from your own.” - Plato
नमस्कार दोस्तों !!!
आपने अपने जीवन मे कई कठिनाइयों का सामना किया होगा, कई धोखे खाये होंगे, कई गलत फैसले लेने और गलत विकल्प चुनने का आपको अभी भी दुःख होगा; और इन्ही सभी कारणों से आप अपने बच्चों के मार्ग दर्शक बन उन्हें हर कदम पर सही राह दिखने की कोशिश करते होंगे | आप जरूर यह सोचते होंगे की - "सही समय पर सही दिशा ना मिलने से जीवन मे जो गलतियाँ आपसे हो गयी; कही वही गलतियाँ आपके बच्चों से भी ना हो जाये" और यही सोच कर आप उन्हें कदम-कदम पर समझाते और सीखाते रहते होंगे |
आपका बच्चों लिए सदैव चिंतित होना, उनके जीवन को बेहतर बनाने मे पूर्णतः केंद्रित रहने मे कोई बुराई नहीं हैं “आखिरकार वे आपके भविष्य हैं”; परन्तु मुझे समझाइये - एक-एक पल उनके पीछे पड़े रहना, हर फेसले पर अपना मत देना, अपनी सोच उन पर थोपना भला ये कहाँ से ठीक हैं ?
आप सदैव यही कामना करते होंगे की आपके बच्चे अपने जीवन मे आत्म-निर्भर (Self-dependent) बने, स्वयं निर्णय (Self-decision) लेने मे समर्थ हो; पर आपने कभी सोचा की यह सभी गुण एक व्यक्ति मे तभी आ सकते हैं जब वह बचपन से अपने जीवम मे छोटे-छोटे निर्णय लेने लगे | अब रातों रात जादू तो नहीं हो सकता जो उन्हें अचानक से आत्म-निर्भर (Self-dependent) और स्वयं निर्णय (Self-decision) लेने मे निपुड़ बना दे ? जब आप उनके कपड़े का चयन करने से लेकर, उनके स्वाद तक का चयन करेंगे तो वह कैसे अपने लिए निर्णय लेना सीखेंगे; और आपका उनके लिए चयन करना सिर्फ यही तक सीमित नहीं रहता आप तो उनके पल-पल के निर्णय भी स्वयं ही लेते हैं |
सोचिये “उनके लिए क्या ज्यादा बेहतर है और क्या नहीं; इस बात की समझ क्यों उनमे नहीं आती ?” - क्योंकी आप शुरू से बच्चे को मजबूर करते है की वह आपके निर्णय को सर्वोच्य मान कर उसका अनुसरण करता रहे; फिर चाहे वह मज़बूरी मे ही क्यों ना हो |
आज 8 ऐसी चीजों के बारे मे बात करेंगे जिनके लिए आपको अपने बच्चों को कभी मजबूर नहीं करना चाहिए - Today 8 will talk about such things for which you should never force your children -
1) कभी भी उन पर अतिरिक्त गतिविधियों को करने का दबाव न डाले - Never force them to do extracurricular activities
हम सभी के अपने बच्चों के लिए कुछ सपने होते हैं; बच्चा एक्टर बने, सिंगर बने, डांसर बने, किसी एक खेल मे अच्छा हो इत्यादि…| आज कल यह हो गया है की बच्चे को पढ़ाई के अलावा भी बहुत हुनर होने चाहिए; परन्तु उनको हरफनमौला Allrounder बनाने की दौड़ मे आप उनसे ही पूछना भूल गए उनको क्या करना अच्छा लगता है ? क्या वह एक्टर बनना भी चाहते हैं ? हो सकता है आप उनको एक्टर बनाना चाहते हो पर वह तो फुटबॉल खेलना चाहते हैं | बच्चों की इक्षा जानने की कोशिश करें सभी बच्चों की अपनी पसंद होती हैं; ना तो सभी गा सकते है और ना सभी खेल सकते हैं….परन्तु जो वह करना चाहते हैं उसमे वह बहुत बेहतर कर सकते हैं | बचपन कुछ समय के लिए ही होता है अतिरिक्त गतिविधियों को करने का दबाव ना डाले और उनकी इच्छा का सम्मान करें |
2) हर समय अध्ययन करने के लिए मजबूर ना करें - Don’t force to study all the time
हर माता-पिता के जीवन का एक ही धय होता है की उनका बच्चा उनसे ज्यादा अच्छा पढ़े और बड़े पद को प्राप्त करें | केवल पढ़ने को ही बच्चों के सफलता से जोड़ना और उन्हें हर एक पल सिर्फ पढ़ने के लिए मजबूर करने से आपको कुछ प्राप्त नहीं होने वाला; इस तरीके से केवल और केवल आप बच्चों के मन मे पढाई के प्रति घृणा ही पैदा करते हैं | पढ़ने को शुरुआती उम्र से बच्चों के लिए मजेदार गतिविधि बनाये, पढ़ने का समय तय करें, ज्यादा नहीं सिर्फ एक-दो बार ही किताबों के द्वारा उनको पढ़ाये बाकि समय उन्हें व्यावहारिक रूप से सीखने दें| किताबों से ही पढ़ने और सिखने को कभी 100% सफलता का श्रोत ना माने |
3) जब वे कुछ रचनात्मकता के बीच में हों तो उन्हें छोड़ने के लिए मजबूर ना करें - Don't force them to leave when they are in middle of some creativity
रंगो के साथ खेलना और उसको सब जगह फैला देना (playing with colors and colors allover), मिट्टी से किसी अज्ञात जीव को आकार देना (giving shape to unidentified creature with mud), कागजों को काटना (cutting of papers allover), कुछ समझने के लिए बिना रुके बहार देखते रहना (watching outside nonstop to understand something).... सुनने मे कितना प्यारा लगता हैं परन्तु असल मे Parents को बड़ा परेशान करता हैं | मैं मानती हूँ समय के आभाव मे यह थोड़ा मुश्किल हैं पर यही तो आपके बच्चे की रचनात्मकता हैं | वह जब कुछ अलग कुछ नया कुछ अनोखा कोशिश करते है तो उनको आपके सराहना की जरुरत होती हैं ना की आपके धुतकारने की... “ऐसे नहीं होता, ये तुमने क्या अजीब सा बना दिया, यह रंग ठीक नहीं है” इत्यादि बोलने की जगह देखे आपके बच्चे की क्या बेहतरीन सोच है; उसकी सोच को समझने की कोशिश करें और उन्हें प्रोत्साहित करें ना की इस रचनात्मकता के बीच में उन्हें रोके और उसको बंद करने के लिए मजबूर करें|
4) उन्हें कभी माफी मांगने के लिए मजबूर ना करें - Never force them to apologize
बचपन जीवन का वह चरण हैं जिसमे बच्चे गलतियाँ करते हैं और उन गलतियों के द्वारा सीखते हैं; वैसे ही जैसे आपने भी सीखा होगा। . . परन्तु क्यों ऐसा होता है की जो गलतियाँ वह नादानी मे कर देते हैं आप उसके लिए भी उनसे जबरदस्ती माफ़ी मांगने के लिए कहते हैं | माफ़ी मांगना सीखाना गलत नहीं हैं परन्तु जो गलती उनसे नादानी मे हो गयी हैं उसके बारे मे वह शयद जानते ही नहीं थे; तो क्या उनको पहले उसके बारे मे बताना ठीक नहीं होगा ना की जबरदस्ती उन्हें उसके लिए दोषी करार कर देना | याद रखे गलती को महसूस करना एक बहुत धीमी प्रक्रिया हैं और यह उम्र के साथ धीरे-धीरे बच्चों मे स्वयं आ जाएगी परन्तु आपको भी धैर्य के साथ उनको सदैव समझते रहना होगा |
5) उन्हें सब कुछ खाने और पसंद करने के लिए मजबूर ना करें - Don’t force them to eat & Like everything
मेरा सवाल "क्या आपको खाने मे सबकुछ पसंद हैं ?" - नहीं नाजब आपको स्वयं सबकुछ और हर तरह का स्वाद नहीं भाता फिर कैसे आप सोच सकते है की आपके बच्चों को जो भी आप खिलाये वह तुंरत पसंद आ जाये | खाने मे सभी की अपनी पसंद और नापसंदी होती हैं; उन्हें सब स्वाद चखाने की कोशिश लगातार करते रहे परन्तु उनको कभी भी सब कुछ खाने के लिए मजबूर ना करें | स्वयं उनके सामने स्वस्थ वर्धक खाने खाये और उनको उसके फायदे बताते रहे धीरे-धीरे उनको भी इन खानों का स्वाद समझ आने लगेगा |
6) व्यक्तित्व पर कोई जबरदस्ती ना करें - Never force Personality
What is Personality ? - व्यक्तित्व क्या हैं ?
जो आपके बच्चे के प्रकृति को परिभाषित करे वह उनका व्यक्तित्व होता हैं। आपने देखा होगा कुछ बच्चे बहादुर Brave , कुछ संवेदनशील Sensitive, कई अंतर्मुखी introvert तो काफी बच्चे बहिर्मुखी extrovert होते हैं; यह उनका व्यक्तित्व होता हैं | उन्हें इसके लिए डांटे नहीं और जोर जबरदस्ती ना करें क्योंकी अगर ये व्यक्तित्व बदला गया तो वह अपने आपको ही खो देंगे | उनके व्यक्तित्व को संजोये और आगे बढ़ते रहने को प्रोत्साहित करें |
7) अपनी पसंद के अनुसार कभी भी मित्रवत होने के लिए मजबूर ना करें - Never force to be friendly as per your choices
आप सदैव यही चाहते हैं की आपके बच्चे सभी दोस्तों से अच्छे से मिले, उनसे अच्छे से बाते करें, उनके बच्चों के साथ दोस्ती करें, अपने स्कूल मे भी सबसे मिलनसार रहे और इसके लिए आप उनको रोज़ समझा समझा कर थक चुके होंगे | बच्चे अपने दोस्त और अपनी दोस्त मंडली स्वयं चुनते हैं उनको सबसे मिलने के लिए मजबूर ना करें| दोस्ती दिल का ऐसा रिश्ता हैं जो सबसे नहीं जुड़ता और जिससे जुड़ता हैं उससे जीवन भर नहीं टूटता |
8) नए वातावरण में तुरंत अनुकूलित होने के लिए मजबूर ना करें - Don’t force to adapt in new Environment immediately
आपने देखा होगा जब आप किसी रिश्तेदार के घर जाते हैं तो आपके बच्चे उनसे खुल कर बात नहीं करते, ना ठीक से रहते है, और साथ ही साथ उदास और गुमसुम हो जाते हैं; ऐसे इसलिए होता हैं की वह नए वातावरण से मेल नहीं बैठा पाते | एक तो बच्चा अपनी जगह से अलग होने से दुखी रहता है और दूसरी तरफ आप उस पर तुरंत ख़ुशी-ख़ुशी नए बदलाव को अपनाने का दबाव डालते हैं| बच्चों को समय दें उनको प्यार से मनाये और कोई ज़ोर ना डाले; वह नए माहोल मे स्वयं ही धीरे धीरे मिल जाते हैं |
“Your kids require you most of all to love them for who they are, not to spend your whole time trying to correct them.” ― Bill Ayers
प्यार और सद्भाव से सदैव कोशिश में लगे रहे; अपनी परवरिश पर भरोसा रखे और उनको अपने फैसले स्वयं लेने दे ताकि वह स्व निर्णय लेने मे समर्थ बन पाए |
DeepTea





Good points, i am following all these things
ReplyDeleteThank you 🙏 keep it up dear
DeleteWell all correct👏👏👌👌👍👍 I suppose hard to follow sometimes.
ReplyDeleteVery true. Well said
ReplyDeleteThank you 🙏
DeleteWell said deepaji. 👏👏
ReplyDeleteSwati- well said
ReplyDeleteThank you 🙏 Swati
Deleteमजबूर तो नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ परिस्थितियों में समझाया जा सकता है |
ReplyDeleteThank you 🙏
DeleteAll points are correct....But sometimes hard to follow
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लेख है
ReplyDeleteThank you 🙏
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