आत्मप्रेम - निभाये स्वयं से ये अटूट रिश्ता | Self-love - this unwavering relationship with oneself

आत्मप्रेम - निभाये स्वयं से ये अटूट रिश्ता - Self-love - this unwavering relationship with oneself



नमस्कार दोस्तों ! हम सबके जीवन मे कई बार ऐसी परिस्थिति जाती है जब हमे समझ नहीं आता की हमको क्या हो गया, निराशा से जीवन शुन्य सा लगने लगता है, हमको ज्ञात ही नहीं होता कि हम कैसे प्रतिक्रिया दे रहे है, अपने आप पे नाराज़गी आती है, लगता है हम कुछ संभाल ही नहीं पा रहे, महसूस होता है हम किसी योग्य नहीं हैं |

ऐसा महसूस करना गलत नहीं है; ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है; हम मे भावनाये है तभी तो हम इंसान है कोई वस्तु नहीं | पर सोचना ये है की हम अपने ही लिये इतना गिरा हुआ, नाकाबिल, नाकारा कैसे महसूस करने लगते है ? क्या हम अपनी स्थितियो और समस्याओं को ज्यादा महत्त्व देते है; अपने आपको खोया हुआ पाते है और ये भूल जाते है की हमारी हमारे प्रति भी कोई ज़िम्मेदारी है; क्यों हम ये पहले महसूस करते है कि कोई हमे समझे, हमको प्यार करे ? क्यों हम स्वयं को पहले प्यार नहीं करते।

हम सभी को बचपन से यही सिखाया जाता है कि दूसरों को प्यार करो, दूसरों  का सम्मान करो; पर क्यों आत्म प्रेम करने कि प्राथमिकता को सिखाया नहीं जाता | आत्म प्रेम करने से कोई स्वार्थी नहीं बन जाता; जब हम स्वयं को प्यार करेंगे तभी दुसरो को प्यार बाँट पायेंगे; जिस इंसान का स्वयं का मन प्रेम से ख़ाली है वह दूसरों  को कैसे प्यार देगा?


आत्म प्रेम क्या होता है ? - What is Self Love ?


आत्म प्रेम स्वयं के प्रति सम्मान, देखभाल, आत्मविश्वास और शर्तरहित प्यार होता है; ये एक समर्थन है जो हम स्वयं को देते है; किसी भी परिस्थिति मे अपने आपके साथ डट के खड़े रहने की और स्वयं को स्नेह करने की|

कई शोधो मे बताया गया है की आत्म प्रेम करने वाले व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक इस्थिति दूसरों के मुकाबले बेहतर बनी रहती है; वह स्वयं मे  इसके द्वारा एक सकारात्मकता बनाये रखता है जिससे उसका मन और स्वाभाव खुश और शांत रहता है |

"आप, स्वयं; पूरे ब्रह्मांड में औरों की तरह, अपने स्वयं के प्यार और स्नेह के लायक है।" - बुद्ध


आत्म प्रेम के जरिये ही हम अपने आप से दोस्ती का रिश्ता मज़बूत कर सकते है; हर शुरुआत स्वयं से ही होती है फिर चाहें वह आत्म प्रेम की ही क्यों हो; हमारा मूल घर स्वयं हम ही है तो आईये स्वयं से ही इस प्रेम की शुरुआत करें| जानिए उन छोटे-छोटे कदमो को जिससे आप स्वयं के प्रति आत्म प्रेम को विकसित कर सकते है; और अपने प्रति एक सच्चा और अटूट रिस्ता निभा सकते है :-

1)         दूसरों से अपनी तुलना ना करें - Don't compare yourself to others –

कहानी - एक साइकिल वाला व्यक्ति सड़क पे मोटरगाड़ी वाले को देख कर बोला - वाह क्या किस्मत है!; उसी समय एक विकलांग व्यक्ति सामने से निकला तो इस इंसान को महसूस हुआ कि वह स्वयं भी कितना भाग्यशाली है |
हम अपने जीवन को जब दूसरों के जीवन से तोलने लगते है, तो हमे अपने जीवन मे कमिया दिखने लगती है; हम स्वयं को और अपनी समस्याओ को कोसने लगते है; भूल ही जाते है जो हमारे पास है उसके लिए भी कोई तरस रहा है |
हमको अपने हर पल को जीना चाहिए, धयान दे आपके पास क्या अनमोल है जैसे - आपका परिवार, आपके दोस्त, आपकी नौकरी, आपकी अच्छी परस्थितियाँ; और इसके लिए अपने आपको सौभाग्यशाली माने; इस प्रकार एक अनमोल ख़ुशी की अनुभूति होगी जिससे मन खुश होगा और एहसास होगा उस प्यार का जो स्वयं के प्रति आप के अंदर है |


2)         अपने लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित ना करें - Don't set big goals for yourself-

क्या हम भूल गए है हम इंसान है कंप्यूट नहीं, हमने अपने जीवन मे  इतने बड़े लक्ष्य निर्धारित कर लिए है जिसको हासिल करना शक्तिमान के बस की भी बात नहीं है |
उदाहरण - आज की महिलाओं को "सुपरवुमेन" बना दिया गया है, मीडिया के प्रचार मे बहु हाथों वाली महिला का चित्र इतना सामान्य दिखने लगा है की हम स्वयं ही भूल गयी है की हमारे दो हाथ ही है और हम एक मनुष्य है, जो गलती कर सकता है, देर से पहुंच सकता है, थक सकता है, अप्रबंधित हो सकता है और भूल भी सकता है |
जब स्वयं ही हम भूल गए है तो दुसरो को कैसे याद रहेगा की हम उनकी तरह ही एक आम इंसान है|
कहने का तात्पर्य है कि अपने आप पे इतना दबाव बनाये, वास्तविक और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करे| कुछ कार्य बिगड़ जाये तो उसपे इतना परेशान न हो जैसे ज़िन्दगी ही खत्म हो गयी, शांति एवं धैर्य से काम को दुबारा करें और अपने आप को मौका दे; स्वयं को समझे तभी हम अपने से प्रेम कर पायेंगे |



3)         परिपूर्ण बनने का प्रयास ना करें - Don't try to be perfect -

कभी महसूस किया है हम लगातार अपने आपको उत्तम घोषित करने के लिए स्वयं को घसीट रहे है| अपनी क्षमता से ज्यादा मेहनत करते है, ताकी हम ये साबित कर पाए की हम उत्तम है; जिसकी वजह से हमारा दिमाग हमेशा थका हुआ और परेशान महसूस करता है|
कुछ समय निकालें, गहरी सांस लें और सोचे कौन सी दौड़ मे लगे ह; जब अपने आप से खुश नहीं तो क्या लाभ है ऐसी दौड़ का|
स्वयं को समझने का प्रयास करें, ज़िन्दगी बहुत छोटी है उसको शांति और प्यार के साथ जिए| स्वयं से संतुष्ट रहने की कोशिश करें, आप जैसे है बेहतर है, स्वयं से प्रसन्न रहे और खुद को प्रेम करें |

4)         दूसरों की परवाह किये बिना जीओ - Live regardless of others -

हम एक सामाजिक प्राणी है और हमे दूसरों के साथ व्यवहार रखना पड़ता है, जैसे ऑफिस मे, घर पे, पाठशाला आदि; यहाँ हम कई लोगो से मिलते हैं  हम उनके प्रति धारणा बनाते है और वह हमारे प्रति; पर कभी कभी हमारे प्रति दुसरो की धारणा को अपनेआप पे हावी करलेते है और उनके अनुसार अपने जीवन मे बदलाव लाने लगते हैं |
उदाहरण - जब पहली बार हम महाविद्यालय जाते है दूसरे विद्यार्थियों से मिलते है तो अपने आपको घृणा से देखने लगते है, मान मे आने लगता है हम अच्छे नहीं दिखते, अच्छे कपडे नहीं पहनते आदि; पर क्या ये सही है ? हम अपने आप मे अनमोल, प्रतिभाओ से पूर्ण है |
अब ये आपके ऊपर निर्धारित करता है की आप अपने विचारो को उठाते है या दुसरो की परवाह मे स्वयं को परेशान करते  है; याद रखे आप जैसे है वैसे ही शानदार है| स्वयं के प्रति सदभावना रखिये और आत्मप्रेम करीये |



5)         खुद की सराहना करें - Appreciate yourself -

अपनी उपलब्धिओं पर सराहना पाने के लिए हम क्यों हमेशा दुसरो का इंतज़ार करते है ? क्यों ऐसा होता है की हमको स्वयं को सराहने का विचार भी नहीं आता? ये लापरवाही हम स्वयं के लिए कैसे कर जाते है| हम हमारे सबसे बड़े प्रशंसक और  आलोचक होते है, हमसे बेहतर हमको कौन जान सकता है; इस बात का ज्ञान होते हुए भी हम किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा सराहना पाने की प्रतीक्षा क्यों करे? अपने आप को सराहे ये स्वयं के प्रति हमारा कर्तव्य है |

6)         अपनी आध्यात्मिकता का अन्वेषण करें - खुद पर विश्वास रखें - Explore your spirituality - believe in yourself

हम सभी को कही कही उस सर्वोच्च शक्ति पे विश्वास होता है, भले ही नाम अलग अलग हो पर हम को अपनी प्राथनाओ पर अटूट विश्वास है  | आध्यात्मिकता  का अन्वेषण करें, अध्यात्म मे कई ऐसे शक्तिया है जो हमे हमसे और जोड़ती है , हमारे मन और आत्मा को शांति और प्रसन्ता से भर देती है | आत्म विश्वास को और मजबूत करती है और हमे असीम ख़ुशी की प्राप्ति होती है, जिससे हम अपने आप को महत्व देना सिखते है और अपना सम्मान करते हुए अपने आप से प्रेम करने लगते है |




चार्ली चैपलिन (अंग्रेजी हास्य अभिनेता) कहते है - Charlie Chaplin (The Great English comedian) said -

जैसा ही  मैंने खुद से प्यार करना शुरू किया, मैंने खुद को ऐसी किसी भी चीज से मुक्त कर लिया, जो मेरे स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है - भोजन, लोग, चीजें, परिस्थितियां; और सब कुछ जिसने मुझे नीचे और खुद से दूर कर दिया। सबसे पहले, मैंने इस दृष्टिकोण को एक स्वस्थ अहंकार कहा। आज मुझे पता है कि यह स्वयं का प्यार है

इंसान की ज़िन्दगी मे दुःख, परेशानी और गलतियों का सिलसिला तो हमेशा लगा ही रहेगा; पर इसके चलते हमे स्वयं को माफ़ करना सीखना पड़ेगा |  स्वयं से प्यार का पवित्र रिश्ता बनाके हम अपने जीवन के नज़रिये को बदल सकते है, हम बेहतर है और बेहतरीन बन सकते है|


जीवन को इतना कठिन और उलझा मत बनाये कि स्वयं का संतुलन ही खोने लगे, आत्मप्रेम से जीवन और रिस्तो मे सुधार लाये, स्वयं के प्रति उदार और विनम्र रहे, यही स्वयं से सच्चा आत्मप्रेम है|

स्वयं को निहारे, शायद आप को वह व्यक्ति मिल जाये जिसका आप इंतज़ार कर रहे है अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए|



इसके साथ ही आपसे दुबारा मिलने का वादा करते हुए आज विदा लेती हूँ|

DeepTea


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