मन और आत्मा का डीटॉक्स | Detox your Soul
मन और आत्मा का डीटॉक्स - Detox your Soul
नमस्कार दोस्तों ! हम मे से शायद ज्यादातर
लोगो ने डीटॉक्स को शरीर के संबंध मे ही पढ़ा और सुना होगा; पर क्या आपने कभी सोचा - मन
और
आत्मा का डीटॉक्स क्या होता
है?
हम
सभी
अपने
बड़े
त्योहारों
- जैसे
दिवाली,
होली,
ईद,
क्रिसमस
पर
घर
की
पूरी
सफाई
करते
है,
एक
भी
कोना
नहीं
छोड़ते;
क्या
उसी
प्रकार
हमे
अपने
मन
और
आत्मा
को
भी
समय-समय पर साफ़ (डिटॉक्स)
करना
चाहिये
?
हमारा मन और आत्मा ही प्रधान है और यही हमारा पहला घर है; ये जानते हुए भी हम कभी इसकी सफाई के बारे मे नहीं सोचते | हम सबने सामान्य दिनचर्या मे अपने मस्तिष्क को अधिभार (overload ) कर लिया है; दिमाग को इस कदर कार्यरत कर लिया है कि सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से ही ध्यान हट गया है | आधुनिक जीवन शैली के नाम पर ज़िन्दगी को एक दौड बना लिया गया है और इस कारण हमारा मस्तिष्क बहुत अशांत और व्याकुल रहने लगता है| इन सभी समस्याओ का एक ही समाधान है – “अपने मन, मष्तिस्क और आत्मा का डीटॉक्स” |
सीधे शब्दों मे
मन कि
सफाई / डीटॉक्स बड़ी
सरल है - हमारे
मस्तिष्क मे विषैले
सामान का आना
बंद
कर
दे
और
भरी
हुई
जहरीली चीजों से
मुक्त हो जाये|
पर
जितना ये सुनाने
मे
आसान
लगता
है,
क्या
ये
उतना
सरल है
? जवाब
है
– नहीं
तो
क्या
करें
जिससे
हम
स्वयं
के
प्रति
इस
अमूल्य
जिम्मेदारी
को
निभा
पाए,
और
स्वयं
के
मन,
मष्तिस्क
और
आत्मा
मे
भरे
हुए
उस
विषैली
सामग्री
से
जल्द
से
जल्द
मुक्त
हो
पाए
| आईये जाने कुछ तरीके जिसके द्वारा
हम
इस
महत्वपूर्ण
कार्य
को
थोड़ा
आसानी
से
कर
सकते
है
–
1) जीवन से विषाक्त लोगों को बाहर निकाले - Get toxic people out from your life
क्या
आपका
किसी
ऐसे
व्यक्ति
से
मेल
जोल
है
जो
समय-समय पर आपको नीचा दिखाने
कि
कोशिश
करता
है,
आपको
बार-बार नाकारा
महसूस
कराता
है,
बेकार
का
तनाव
पैदा
करता
है,
आपकी
आये
दिन
आलोचना
करता
है;
तो
ये
सब
लक्षण
है
एक
विषाक्त
व्यक्ति
के|
ये
कोई
भी
करीबी
हो
सकता
है
जैसे
आपका
पारिवारिक
सदस्य,
मित्र
इत्यादि|
ऐसे
लोगो
को
अपने
जीवन
मे
कोई
स्थान
न
दे
और
जितनी
जल्दी
हो
उतनी
जल्दी
अपने
आप
को
इनसे
अलग
कर
ले
|
2) अपने अतीत को पीछे छोड़े - Leave your past behind
हम
सभी
के
जीवन
मे
कोई
ऐसा
अतीत
होता
है
जिससे
हम
चाह
कर
भी
बहार
नहीं
निकल
पाते
| अतीत
हमारे
मन
मे
इतना
घर
कर
जाता
है
कि
दिन
हो
या
रात
इसके
बारे
मे
ही
सोचते
रहते
है;
और
ये
हमारे
दुःख
का
मूल्य
कारण
बन
जाता
है
| अतीत
घर
मे
रखे
उस
कचड़े
कि
तरह
है
जिसे
हम
बिना
अवशयकता
के
भी
इकट्ठा
करके
रखते
है
|
हमे
स्वयं
को
ये
याद
कराना
चाइये
कि
ये
अतीत
है
और
हमारा
आज
और
आने
वाला
भविष्य
इसके
कारण
प्रभावित
हो
सकता
है; अपने
आपको
इससे
बहार
निकले और आने
वाले
भविष्य के लिए
रास्ता खोले |
3) अपनी भावनाओं से जुड़े - Connect with your feelings
हम
मनुष्य
सामाजिक
प्राणी
है,
लोगो
से
मिलना
उनके
बारे
मे
जानना
समझना
पसंद
करते
है;
पर
स्वयं
कि
भावनाओ
को
कभी
नहीं
समझते,
यहाँ
तक
कि
अपनी
ही
भावनाओं
को
दबा
लेते
है|
भावुक
होना
गलत
नहीं
है
पर
इसको
बहार
न
आने
देना
बहुत
गलत
है
| जब
तक
हम
अपनी
भावनाओ
को
व्यक्त
नहीं
करेंगे
तब
तक
हमारे
अंदर
कि
भड़ास
कैसे
बाहर
आएगी
| तो
अपनी
भावनाओ
से
जुड़े
और
उसको
व्यक्त
करें
|
4) किताबो से जुड़े - Related to books
किताबें मनुष्य कि सबसे अच्छी मित्र होती है; किताबो मे वह खज़ाना है जिसमे हमारी हर समस्या का समाधान है | किताबे
हमे
मुश्क्लि
समय
मे
प्रेरणा
देती
और
हमारे
जीवन
मे
आशा
का
संचार
करती
है
| किताबो
मे
वह
सीख
है
जो
हमे
अच्छे
और
बुरे
का
फर्क
बताती
है
| ये
हमारी
साथी
दोस्त
बन
कर
हमे
अकेलेपन
का
एहसास
नहीं
होने
देती
और
हमारी
मनोदशा
को
नियंत्रण
मे
रखती
है
|
5) कुछ समय ख़ामोशी मे बिताये - Spend some time in silence
स्वयं
से
जुड़ने
का
सबसे
अच्छा
तरीका
है
कुछ
समय
शांत
रहना
| हमारा
मस्तिष्क
एक
यंत्र
है;
जिस
प्रकार
किसी
यंत्र
को
समय-समय पे पुनश्चर्या
और
पुनर्प्रारंभ (Refresher and restart) करने की आवश्यकता पड़ती है, उसी प्रकार हमारे मन और मस्तिष्क को भी इसकी जरुरत होती है | मौन हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क
के
लिए
एक संजीवनी
बूटी के सामान कार्य करता है; हमे फिर से अपने प्रति सजग बनता है |
6) अपने शौक़ को समय दें और नई कला सीखें - Give your hobby time and learn new art
क्या
आप
सामान्य
दिनचर्या
से
ऊब
गए
है;
दिमाग
वही
कर-कर के थक गया है ? इसका समाधान
है
– “अपने
शौक़
को
समय
दें
और
नई
कला
सीखें”|
आपके
शौक
को
दुबारा
शुरू
करे,
जैसे
पेंटिंग,
बागवानी
आदि|
अपने
शौक
के
लिए
समय
निकलना
सीधी
तरह
से
अपनी
खुशी
पर
निवेश
करने
के
बराबर
है|
नयी
कला
सिखने
कि
कोई
उम्र
नहीं
होती,
इससे
हम
अपने
अंदर
के
कलाकार
को
और
भी
उभार
पायेंगे
और
स्वयं
से
जुड़
पायेंगे
|
अपने
शौक़
को
दुबारा
शुरू
करने
और
नई
कला
सिखने
से
हम
अपनी
क्षमताओं
को
फिर
से
जाँच
पते
है
और
अपने
अंदर
नयी
ऊर्जा
का
संचार
कर
सकते
है
| तो खुद
को
चुनौती दें और एक अद्भुत
आनंद
का
एहसास
करें
|
7) सोशल मीडिया से दूरी बनाये - Keep Distance from social media
हम सभी आज कल अपना जयादा समय सोशल मीडिया
जैसे
फेसबुक,
इंस्टाग्राम,
टिक-टोक, ट्वीटर
इत्यादि
पे
बिताते
है;
एक
अध्ययन
मे
पता
चला
है
कि
- औसतन,
भारतीय
उपयोगकर्ता
सोशल
मीडिया
पर
2.5 - 3 घंटे
बिताता
है
| सोशल
मीडिया
के
काफी
फायदे
है
पर
क्या
इसको
सर
पर
चढ़ा
लेना
ठीक
है?
पल
पल
कि
खबर
रखना
और
एक-एक बात को लोगो तक पहुंचना
क्या
ये
सब
जरुरी
है
?
सोशल
मीडिया
पर
ज्यादा
समय
बिताने
से
हम
अपने
जीवन
कि
तुलना
दूसरों
से
करना
शुरू
कर
देते
हैं;
जिससे
हमे
यह
महसूस
होने
लगता
है
कि
हम
कम
सक्षम
हैं,
हमने
अपने
जीवन
में
काफी
कम
हासिल
किया
है,
हमने
कम
विदेश
यात्राये
कि
है
और
हम
दुसरो
के
मुकाबले
कम
भाग्यशाली
हैं
इत्यादि।
ये
हमे
हमारी
मौलिकता
से
ही
विचलित
कर
देता
है
|
अपने
सोशल
मीडिया
के
प्रयोग
को
सिमित
करें
और
इसको
मन
और
मस्तिष्क
पर
हावी
न
होने
दे;
जिससे
हमारी
व्याकुलता
कम
होगी
और
दिमाग
शांत
रहेगा
|
हम
स्वयं
के
लिए
अगर
ये
कदम
उठाये
तो
अपने
आपको
अधिक
सुखी
व
संतुस्ट
महसूस
करा
सकते
है
| ये
सभी
प्रयास
थोड़े
मुश्लिक
है
पर
असंभव
नहीं;
हमे
अपने
मन,
मस्तिष्क
और
आत्मा
कि
शुद्धि/
डीटॉक्स
के
लिए
ये
प्रयत्न
करने
चाहिए
|
“हम
अपने
विचारों से आकार
लेते
हैं;
जैसा
हम
सोचते हैं, वैसे
हो
जाते
हैं।
जब
मन
शुद्ध होता है,
तो
आनंद
उस
छाया
कि
तरह
होता
है,
जो
कभी
नहीं
छूटती।" – बुद्धा
आज
इसके
साथ
विदा
लेती
हूँ,
आगे
फिर
मिलने
का
वादा
करते
हुए|
DeepTea








Great thoughts deepti n nicely written. .keep it up
ReplyDeleteThank you
DeleteAll point very difficult for me to implement, but i ll try. Nicely explain
ReplyDeleteNice one❤❤ hard to implement few....
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत बढिया लेख
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