बच्चे और प्रकृति - Kids and Nature
बच्चे और प्रकृति -
Kids and Nature
नमस्कार दोस्तों !! हम मनुष्य इस अनोखी प्रकृति का हिस्सा है | हमारा शरीर प्रकृति के पाँच मूल तत्वों से मिल कर बना है- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष; जिसका विश्लेषण करे
तो - पृथ्वी तत्व (हड्डियों और मांसपेशियों), जल तत्व (रक्त), वायु तत्व (सांस), अग्नि तत्व (गर्मी), और अंतरिक्ष तत्व (भीतर खालीपन) होता हैं । इन सभी तत्वों का संतुलन प्रकृति से जुड़े रहने पर ही संभव है |
याद करें अपना बचपन हम सभी ने प्रकृति मे कितना समय बिताया हैं;
वह पहली बरसात मे खेलना, फूलो को सूंघना, खुले मैदान मे बेपरवाह दौड़ना, तितलियों को पकड़ना और फिर छोड़ देना, बारिश होते ही कागज की नाव बनाकर चलाना, गर्मियों मे खुली छत पर सोना इत्यादि…अनंत यादें है इस प्रकृति के साथ; पर क्या हमने इस प्रकृति के साथ अपने बच्चों को भी ऐसी अमूल्य यादें बटोरने दी हैं?
औद्योगिकीकरण के विकास की वजह से आज महानगरों और उपनगरों मे बच्चों के खेल-कूद करने के लिए ज्यादा मैदान, पार्क नहीं बचे हैं; यहाँ तक की पेड़ और पौधे भी नज़र आना बंद हो गए हैं| नदिया तालाब आदि गंदे नालों मे परिवर्तित हो गए हैं, पहाड़ो को काटा जा चूका हैं| ऐसे मे हम क्या करें जिससे बच्चे प्रकृति के करीब आये और खुले मे साँस लेने की महत्वता को समझें ?
बच्चों को प्रकृति का अनमोल एहसास दिलाने के लिए कुछ सरल गतिविधियों (Activities)
को कराया जा सकता है जिससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास होगा -
“प्रकृति का अध्ययन करो, प्रकृति से प्रेम करो, प्रकृति के करीब रहो। यह आपको कभी विफल नहीं करेगा। ” - फ़्रैंक लॉएड राइट (अमेरिकी वास्तुकार, इंटीरियर डिजाइनर, लेखक और शिक्षक)।
छोटी उम्र मे ही प्रकृति से जुड़ने के कुछ बहुत प्रभावशाली लाभ देखे गए हैं, आईये समझे कुछ ऐसे ही फायदों को –
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बच्चे अपने आप को अकेला महसूस नहीं करते |
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उनका दिमाग हमेशा कुछ नया खोजने मे व्यस्त रहता है |
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धूप और ताज़ी हवा मे खेलने से हड्डियाँ मजबूत और शरीर मे लचीलापन रहता है |
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मिट्टी और रेत में खेलने से रोगनाशक क्षमता (Immune System)
को बढ़ावा मिलता है|
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बच्चे दूसरे बच्चों से घुलना-मिलना और बांटना सीखते हैं एवं उनके प्रति सहानुभूति विकसित होती है |
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अन्य जीवित प्राणी के प्रति दया-करुणा का भाव उत्पन होता है |
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साहस और आत्मविश्वास का निर्माण होता हैं |
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सोचने और समझने की ताकत बढ़ती है |
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आलस्य, तनाव एवं थकान महसूस नहीं होता |
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आत्म-अनुशासित और जिम्मेदार बनते हैं |
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मोटापा और उससे पैदा होने वाली कई शारीरिक बीमारियों से बचते है |
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दिमाग सचेत रहता है |
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धीरज रखना सीखते है |
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विनम्रता आती है |
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साहसी बनते है |
मनोरंजन के लिए आज बहुत सारे प्रौद्योगिकी (Technology)
साधन हैं जैसे -टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, वीडियो गेम्स; पर इन के काफी नुकसान हैं| जहाँ स्क्रीन टाइम दिन भर मे 2-3 बार होना चाइये; वहीं दिन मे 2-3 बार ही स्क्रीन के बिना टाइम मिल रहा है | बच्चों का हर तरह से विकास रुकने लगा हैं, छोटी-छोटी उम्र मे चश्मा लग जाना, मल्टी विटामिन की दवाईयाँ खाना, ताकत के लिए स्वास्थ्य पेय (Health Drinks) का सेवन इत्यादि शुरू हो चुका हैं | पर हम यह भूल गए है की प्राकृतिक खुली हवा और गन्दी मिट्टी मे जो शक्ति है उसका कोई एनर्जी बूस्टर मुकाबला नहीं कर सकता |
थॉमस बेरी (सांस्कृतिक इतिहासकार, बाद में जब उन्होंने पृथ्वी के इतिहास और विकास का अध्ययन किया) कहते है - "प्राकृतिक दुनिया के बारे में बच्चों को पढ़ाना जीवन में सबसे महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जाना चाहिए" |
यही सही समय है जब हम सबको जागरुक होना पड़ेगा और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति के प्रति सचेत करना होगा | बच्चों को उनके जन्मदिवस पर नई वीडियो गेम देने की जगह एक नया पौधा उपहार मे दें | छुट्टीयों मे किसी गाँव मे जा कर वहाँ के लोगो की प्रकृति के साथ निकटता को महसूस करें; या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary)
मे जा कर पृथ्वी का जीवन चक्र (Life Cycle
of Earth) को समझे | गणेश उत्सव पर बच्चों के साथ मिलकर मिट्टी के गणपति की संरचना करें | ये यादें और अनुभव हमारे बच्चों को प्रकृति की बेहतर समझ देगा और उनको प्रकृति के निकट ले जायेगा; उन्हें प्रकृति प्रेमी एवं स्वयं जागरूक बनाएगा |
“प्रकृति के साथ एक रिश्ता बनाएं और यह हमेशा आपके लिए समर्पित रहेगा”
इसी सोच के साथ आपसे आज विदा लेती हूँ; फिर मिलूंगी कुछ नवीन विचारो को लेके।
DeepTea






Actually, totally agree n most of the point u cover m following.
ReplyDeleteI love nature that's y m in Kerala😁
ReplyDeleteTotally agree 🙏🙏and I follow everything you said.....and why not we did the same and we enjoyed it .
ReplyDeleteThank you
DeleteBeautiful lines
ReplyDeleteThank you
DeleteNice anni
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