7 अच्छी आदतें अपने बच्चे में विकसित करें (7 Good Habits to inculcate in Kids)


7 अच्छी आदतें अपने बच्चे में विकसित करें (7 Good Habits to inculcate in Kids)


नमस्ते पेरेंट्स ! हम सभी माता-पिता अपने बच्चों को सही तरीके से बढ़ता हुआ देखना चाहते है; कुछ अच्छी आदतें डालना चाहते हैं ताकि आगे चलकर ये उनके जीवन को बेहतर बनाने मे मदद करे| ये आदतें ना केवल उनके शरीर को स्वस्थ रखेंगी; यहाँ तक की उनके मन और मस्तिष्क को सही प्रकार संचालित करने मे भी मत्वपूर्ण योगदान देंगी |

ये सत्य है की हम हमारे बच्चों के साथ हमेशा नहीं रहेंगे; पर हमारे द्वारा सिखाई गयी छोटी छोटी बातें उनके साथ हमेशा रहेंगी और उनको समय का उपयोग करना और अनुशासित रहना भी सिखायेंगी |

सबसे जरुरी बात यह है कि ये सभी आदतें शुरुआती उम्र से ही हमको उनके मन में बैठानी होगी; जैसे गीली मिट्टी कोई भी आकर ले सकती है उसी प्रकार बच्चों की शुरुआती उम्र अच्छी आदतें सीखने की लिए सबसे श्रेष्ठ होती हैं |

"मनुष्य की बचपन की आदतें उसके भविष्य को निर्धारित करती हैं।"

हम पेरेंट्स स्वयं अपने बच्चों को ये अच्छी आदतें सिखाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं; हम सबको ये ज्ञात है की हमारे बच्चे हमारे पद चिन्हों पर चलते हैं, हमारी अनुकृति (नक़ल) करते हैं| हमे उनको अच्छी आदतें सीखाने के लिए पहले स्वयं उन आदतों को अपनाना एवं पालन करना होगा |

प्रतिदिन अच्छी आदतों का नियमित अभ्यास कराने से बच्चों को इसकी आदत लग जाती है और वह ज़िन्दगी भर इसका पालन करते है | आईये समझे कुछ ऐसे ही अच्छी आदतों को जो हमारे बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है | -

1)     स्वच्छता

बच्चों को ब्रश करना, हाथ धोना, रोज़ स्नान इत्यादि का महत्व सीखाना बहुत आवश्यक हैं; प्रतिदिन व्यक्तिगत स्वच्छता से लेकर आसपास की नियमित तौर पर सफाई सीखने को प्राथमिकता दे| अधिकांश बीमारियों को दूर रखने के लिए स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है। याद रखे स्वच्छता ही सुरक्षा है|


2)     समय का महत्त्व

बच्चों को समय का महत्व समझाए, घर मे प्रत्येक गतिविधि के लिए समय निश्चित करें जैसे - खाने का समय, पढाई करने का समय, खेलने का समय, सोने का समय यहाँ तक की टीवी के लिए भी समय तय करें| इस प्रकार बच्चों को अप्रत्यक्ष रूप से  (Indirectly) अनुशासन मे रहना भी सिखाया जा सकता हैं |


3)     किताबें पढ़ना

हम सभी जानते है किताबे मनुष्य की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं, किताबो मे मिलने वाले ज्ञान के ख़ज़ाने से अपने बच्चों का भी परिचय कराऐ | प्रतिदिन बच्चों के लिए नैतिक, पौराणिक, परियों की कहानियां, साहसिक, एक्टिविटी बुक इत्यादि उनके लिए पढ़े और उनको भी पढ़ने के लिए बोले; इस प्रकार उनकी काल्पनिक एवं तार्किक क्षमता विकसित होगी | उनको सही और गलत की पहचान इन कहानियो के द्वारा ठीक से समझ आने लगेगा |
मैं स्वयं पंचतंत्र की कहानियों का सुझाव दूंगी |


4)     साझा करना ही देखभाल है (Sharing is Caring)

छोटे बच्चों को साझा (Sharing) करना पसंद नहीं होता, सब उन्हें स्वयं ही चाहिये होता हैं | इस बात को स्वीकार ले की हम एक पल मे इस आदत को बदल नहीं सकते|
यह बहुत धीमी प्रक्रिया है, धैर्य रखें, उनसे प्यार से बात करें, उनकी अच्छी आदतों की सराहना करें, स्वयं उनके समक्ष चीज़ो को बाटे (जैसे चित्र बनाते समय रंगो को बातें), उनके साथ साझा करने के बारे मे बात करें | कभी उनको दूसरे बच्चों के साथ मिल बाट कर खेलते देखे तो उसी समय उनको सराहे| सबसे महत्वपूर्ण बच्चों पर कभी गुस्सा एवं जोर-जबरदस्ती ना करें | इन कुछ बातो का ध्यान रखने से धीरे-धीरे बच्चो मे साझा करने के प्रति बदलाव आने लगता हैं|

5)     स्वास्थ्यवर्धक भोजन खाना

आज हमारे देश मे दुनिया के हर कोने का प्रसिद्ध खाना सरलता से मिल जाता हैं; पर इसमें कोई दो राय नहीं की घर के खाने की पौष्टिकता हमे बहार के खाने मे कभी नहीं मिल सकती, बच्चों के बढ़ती उम्र मे स्वस्थ एवं पौष्टिक आहार बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| बच्चों को स्वास्थ्यवर्धक भोजन का महत्त्व समझाए; जंक फूड और स्वास्थ्यवर्धक भोजन को पहचाना सिखाये और उनके जंक फूड खाने की सीमा तय करें
हमे रचनात्मकता के साथ भोजन प्रस्तुत करना चाइये ताकि उनकी खाने के प्रति दिलचस्पी बने; इसके लिए मै सुझाव दूँगी कि आप बच्चो को खाना बनाते समय अपने साथ शामिल करें; यहाँ तक की फलों और सब्जी की खरीदारी में भी उनका सहयोग ले |


6)     शारीरिक फिटनेस

मन और मस्तिष्क के समन्वय के लिए तन का चुस्त और दुरुस्त होना बहुत आवयशक होता है| शारीरिक गतिविधियां जैसे दौड़ना, खेलना-कूदना, नाचना, घर की साफ़-सफाई मे हाथ बटाना  इत्यादि से बच्चों का शरीर स्वस्थ और दिमाग तेज़ बनता है; वही दूसरी तरफ टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम इत्यादि से दिमाग सुस्त होता हैं |
देखा गया है की माता-पिता (पेरेंट्स) के व्यस्त होने की वजह से आज-कल बच्चों का इलेकट्रोनिक मीडिया के प्रति झुकाव ज्यादा हो गया है; पर क्या हम अपने स्वयं के बच्चो के लिए अपने व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय  नहीं निकाल सकते? हमे प्रतिदिन कुछ समय अपने बच्चों के शारीरिक फिटनेस के लिए जरूर समर्पित करना चाइये; समय दे पाने पर भी हमे बच्चों को सक्रिय (एक्टिव) रखने के लिए स्वयं उनके साथ कुछ समय के लिए खेलना, नाचना, दौड़ चाइये; आप स्वयं भी इस प्रकार स्वस्थ और तंदरुस्त महसूस करेंगे|
वह कहते है एक पंथ दो काज | उनके साथ नए एक्सरसाइजेज / खेल सीखें; जैसे - व्यायाम, योग, स्विमिंग, बैडमिंटन, साइकिलिंग,डांसिंग इत्यादि |


7)     भावनाएं व्यक्त करने दे

जब कोई छोटा बच्चा रोता है तो ज्यादातर माता-पिता कहते है चुप हो जाओ या क्यों रोते रहते हो?; पर ये भूल जाते है की रोना एक प्रकार से भाव व्यक्त करना हैं | बच्चों को ये पता नहीं होता की वह अपनी भावनाओं को किस प्रकार हम तक पहुचाये और इस कारण वह कई बार अत्यधिक प्रतिक्रिया (ओवर रियेक्ट) करते है और आक्रामक हो जाते हैं|
हमेशा बच्चों को ये समझाने का प्रयत्न करें की भावनाये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसको व्यक्त करना गलत नहीं हैं ; बस उनको भावनाये व्यक्त करने का सही तरीका सीखना होगा| हमेशा उनको सुनने और समझने के लिए तत्पर रहे; उनको ये विश्वास होना चाइये की चाहे उनके माता पिता कितने भी व्यस्त हो लेकिन उनको समझने के लिए वह हमेशा उनके साथ / पास है |

शुरुआत से लगाई गयी ये छोटी-छोटी आदतें बड़े होने पर भी बच्चों के साथ रहती है और उनको एक अनुशासित व्यक्ति बनाती है | ये आदतें बच्चों के लिए माता - पिता के द्वारा दिया एक ऐसा अनमोल उपहार होता है जो हमेशा उनके साथ रहता है|

जॉन ड्राइडन (अंग्रेजी कवि )  -हम पहले अपनी आदतें बनाते हैं और फिर हमारी आदतें हमें बनाती हैं|”



इसी के साथ आज विदा लेती हुँ और फिर मिलती हुँ कुछ नए विचारो के साथ|

DeepTea




Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

अपनी सोच को सरल बनाये तो जीवन बेहतर बन जायेगा - Simplify your thinking, life will become better

समय बर्बाद होने से कैसे रोकें - How to Stop Wasting Time

8 सबसे आम पछतावे जो लोगों को जीवन के अंत में होता हैं - 8 most common regrets that people have at the end of life