आपका अनमोल खज़ाना - आपकी मुस्कुराहट, आपकी ख़ुशी !!! - Your precious treasure - Your smile, your happiness !!!

आपका अनमोल खज़ाना - आपकी मुस्कुराहट, आपकी ख़ुशी !!! - Your precious treasure - Your smile, your happiness !!!



एक मुस्कुराहट ! जो किसी अनजान को भी एक पल मे अपना बना लेती है, यह एक मुस्कुराहट ही है जो किसी भी रिश्ते का शुरुआती कदम होती है; चाहें वह दोस्ती का रिश्ता हो, प्यार का रिश्ता हो या कोई और रिश्ता |

कई शोधो मे पाया गया है की हमारे अंदर की ख़ुशी हमे किसी भी परिस्थिति मे जीवंत रखती है, समय से पहले वयस्क होने से रोकती है, विपरित परिस्थितियों मे हमे संभालती है, शरीर और मन को विपदाओं मे अचल और मजबूत रखती है |
जब आप मुस्कुराते है तो जीवन और भी बेहतर हो जाता है 

पर ऐसा क्यों होता है की हमारी इस मासूम सी मुस्कान को जीवन के कुछ पहलुओं मे हम खो देते है; हॅंसना, मुस्कुराना ही भूल जाते है; परिस्थियों मे उलझ के अंदर की ख़ुशी को ताला लगा देते है |

ख़ुशी किसी वस्तु की बंधक नहीं होती; क्या आपने देखा है गरीब बच्चो को - सड़क पे फटे कपडे पहने बिना चप्पल, क्या आपने उनके चेहरे की उस भोली मुस्कान पर ध्यान दिया; उनकी मुस्कान मे भगवान दिखाई देता है| हाथ मे कुछ नहीं पर मुस्कान राजाओ जैसी होती है | सोचिये कहाँ से आती है - ये ख़ुशी / ये मुस्कान "उत्तर  है - अपने अंदर से"|

जी हाँ ख़ुशी हमारे अंदर ही होती है, यही वह चीज़ है जिसे आपसे कोई चुरा नहीं सकता, ये किसी दुकान पर नहीं मिलती और कोई उधार पर भी नहीं ले सकता, ये तो हमेशा से हमारे अंदर ही हैं, पर हम ही इसको बहार ढूंढ रहे हैं |  ख़ुशी चुप चाप इंतज़ार करती है हमारे एक इशारे का, इशारा मिलते ही तुरंत जाती है हमे अपनाने; पर इस दरवाज़े पर ताला लगा दिया तो क्या कर पाएगी हमारी मासूम सी ख़ुशी |

भारतवर्ष मे जब हमारे बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते है तो बोलते है "खुश रहो" ये बात कितनी साफ़ है - हमे जीवन मे कुछ प्राप्त हो ना हो अगर ख़ुशी नहीं है तो सब नीरस लगता हैं; भौतिक सुख हमे ऊपरी ख़ुशी तो दे देते है पर ये ख़ुशी स्थायी नहीं होती, धीरे-धीरे हमारी रुचि खत्म होने लगती है और हमे कोई प्रसन्ता नहीं आती| हमारे मन की ख़ुशी स्थायी है और यह किसी वास्तु-साधन की मोहताज नहीं होती|

दुनिया को दिखाने की दौड़ मे हम अपने आप से अलग ना हो इस बात का ख्याल रखना चाहिए; हर पल को ख़ुशी से मुस्कुराकर जीने का जज्बा हर एक के बस की बात नहीं होती |

खुश रहना तो मनुष्य के स्वाभाव मे है, पर सांसारिक सुख-सुविधा की लालसा और जीवन की दौड़ मे हम इस अमूल्य उपहार को अपने मे बंद कर भूल जाते है | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है हमे स्वाभाविक रूप से लोगो के साथ रहना अच्छा लगता हे; हमे अपने परिवार अपने दोस्तों मे रह कर एक अद्भुत ख़ुशी का एहसास होता है हम उनके सहयोग से अपनी ख़ुशी को बरक़रार रखने का प्रयास कर सकते है |

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी 2015 के एक सर्वे मे  ये बताया गया " यदि आप चाहें तो खुश हो सकते हैं: आप जो भी करते हैं उससे खुश रहें, अपने निकटतम रिश्तों को मजबूत करें
75% लोगो का मानना है की उनके अंतरंग रिश्तों की सफलता के कारण वह बेहद खुश हैं  |

अंत मे यही बोलना चाहूंगीजैसे सारे मसाले डालने पर भी बिना नमक स्वाद नहीं आता, इसी प्रकार जीवन मे सभी सुख-सुविधा के बावजूद अगर मन मे  ख़ुशी नहीं है तो जीवन मे कोई स्वाद, आनंद नहीं आता |” 

छोटे छोटे प्रयासों से ही हम अपने ज़िन्दगी मे खुशियाँ भर सकते है|

इसके साथ ही दुबारा मिलने का वादा करते हुए आपसे आज विदा लेती हूँ|

DeepTea

Comments

  1. Sach kaha khushi muskuraahat ke saath hi jivan jio

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  2. Bahut Anmol khazan h Khushi.....nice lines👍👍👍👍

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  3. Keep smiling .It helps to increase yr face value.
    It is art to be happy aur make happy others too.we should learn for make the life successful.

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  4. You writes how I feel...I cant express it but you can very well. Well done Sweety...keep inspiring.❤

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