जब आप स्वयं को बेकार महसूस करने लगें; तो यह याद करें। When you start feeling worthless; remember this.
जब आप स्वयं को बेकार महसूस करने लगें, तो यह याद करें। When you start feeling worthless, remember this.
हम सभी अपना निर्धारित किरदार पूरी निष्ठा से निभाते है चाहे वह हमारे रिश्तों से सम्बंधित हो, हमारी जिम्मेदारियों से सम्बंधित हो या व्यवसाय / पेशे से। काई बार तो इन सभी किरदारों के बीच हम अपने स्वयं के अस्तित्व को भी भूल जाते है और सोच लेते है की बस हमे दूसरों के लिए ही जीते जाना है; और इतना करने के बाद जब यह बताया जाता है की आप बेहतर तो क्या, किसी लायक ही नहीं हैं तो पाँव तले ज़मीन खिसक जाती है; और लगने लगता है जैसे स्वयं ही अपने आप को दफना लो। आप भी इस स्थिति से अंजान नहीं होंगे; जीवन मे काई बार आपको स्वयं लगता होगा या आपको दूसरों से ये सुनने को मिला होगा की आप किसी काम के नहीं हैं।
यह विचार स्वयं उपजाये नहीं होते हैं देखा जाए तो अधिकतर यह दूसरों के बोले जाने पर हम स्वयं के लिए सोचने लगते है; वह कहते है ना की “अगर झूठ 100 दफे बोला जाए तो वह भी सच लगने लगता है” वैसे ही आपकी स्वयं के प्रति यह सोच दरअसल दूसरों की सोच ही होती है जो ना चाह कर भी आपके अंदर घर कर जाती हैं।
“Know your worth. People always act like they’re doing more for you than you’re doing for them.” – Kanye West
अगर फल किसी एक जगह से सड़ना शुरू हो जाए तो धीरे-धीरे वह पूरे फल को ही सड़ा देता है; वैसे ही अगर आपके अंदर यह बात घर कर गयी की आप किसी काम के नहीं है तो आपकी यह सोच जल्द ही आपकी बुद्धि पर हावी होकर आपके सोचने की क्षमता
उसी दिशा मे मोड़ देती है। कुछ लोगो पर यह सोच इतनी हावी हो जाती है की वह स्वयं को एक ऐसे अंधेरे कुएँ मे धकेल देते हैं जहाँ से वापस आना उनके लिए बिल्कुल नामुमकिन
हो जाता है। यह एक ऐसी सोच है जो ना चाह कर भी सदैव आपके साथ रहती है और तिल-तिल कर आपको अवसाद मे घोलती जाती है; आप स्वयं को इतना नकारा और बेकार समझने लगते है की आपको सब पता होते हुए भी कोई काम ठीक प्रकार से सम्पन्न नहीं कर पाते।
आपने पूरे जीवन मे भले ही आपकी कितनी भी उपलब्धियाँ हो, भले ही आपने कितनी भी बड़ी मुसीबतों से हार ना मानी हो पर यह सब एक तरफ धरे के धरे रह जाते है और रह जाता है तो सिर्फ़ एक गम की आप सभी को बेकार लगने लगे हैं। यह गम सुनने मे तो छोटा है पर यह आपके मन मस्तिष्क पर घने बादल की तरह छा जाता है और इसकी वजह है की यह हमारे अपनो के द्वारा दिया हुआ गम होता है; जिनको आपने प्यार किया जिनके लिए जीवन की सभी खुशी और सुख का त्याग कर दिया एवं जिनके हिसाब से जीने की आदत डाल ली वही जब यह कह जाते है तो आप ना चाह कर भी स्वयं को बेकार मानने लगते हैं और जीवन मे कई नामुमकिन लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद भी यह कुछ छोटे शब्द आपको ग्लानि और अवसाद से भर देते हैं।
अगर गहराई मे जा कर सोचे तो आपको यह एहसास होगा की यह एक दूसरे इंसान की सोच है जिसके लिए आप स्वयं को ज़िम्मेदार और उनके विचारों को अपने प्रति सच मान लेते हैं। यह कोई सत-युग नहीं है जहाँ हनुमान ने अपना सीना चीर कर भगवान राम और सीता माता को यह दिखा दिया था की वह उनके दिल मे बस्ते है; यह समझ ले की आप किसी के लिए चाहे कितना भी कर ले उनका आपके प्रति विचारों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं हो सकता। यह वह समय है जहाँ इंसान किसी का नहीं और परिस्थिति एवं समस्याओं ने सभी के जीवन को इस कदर हिला दिया है की व्यक्ति अपने बोल से पहले सोचना का हिसाब-किताब भूल ही गया है। आज-कल बात का ज़रिया आमने-सामने कम और रोबाटिक मतलब फोन और मेसेज पर ज़्यादा हो गया है। आज पूरा परिवार भी सिर्फ़ Dinner के समय ही मिल पाता है और तब तक पूरे दिन की थकान और दुनिया-जहान के तनाव से वह कुछ सुनने और समझने लायक नहीं होते है तो ऐसे मे आप क्या उम्मीद लगा सकते है उनसे ?
मैं यह नहीं कह रही की आप सबकी सोच को सरलता से और हल्के मे ले; अगर सुधार की ज़रूरत है तो सुधार करें परंतु बात को दिल से इतना लगा लेना की स्वयं का ही पतन होने लगे; वह ठीक नहीं हैं। आप मानेंगे
नहीं पर आपकी इस सोच का इलाज और कहीं नहीं स्वयं आपके पास ही हैं और अगर आप ठान ले तो बहुत आसान भी। इन तरीक़ो
से आप स्वयं को दूसरों की विषैली सोच से बचा भी सकते है और अपने आप पर सोच हावी ना होने देने से मन को शांत भी रख सकते हैं।
“You are not worthless. Even if you’ve been called that your entire life.” – Kevin Walker
सबसे पहले आप दूसरों से उम्मीद करना छोड़े, आप जो भी दूसरों के लिए करते हैं वह आपका उनके लिए प्यार और आपकी अपनी ज़िम्मेदारी निभाने
का तरीका हैं; परंतु जब आप वही अपेक्षा
दूसरों से रेखेंगे तो मन अनुसार
प्रतिक्रिया ना मिलने से सबसे ज़्यादा
दुख भी आपको ही होगा।
आप स्वयं अपनी मनःस्थिति को सबसे अच्छे से समझते हैं तो जब भी किसी बात का दुःख आपको घेरने वाला हो तो स्वयं को सचेत करें और नकारात्मक विचार आने से पहले अपने आप को संभाल ले।
स्वयं को अपनी उपलब्धियों और अपने संघर्ष
के दिनों की याद कराए जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल
होने के बावजूद भी आपने अपने निश्चय को दृण रखा और कामयाबी
पाई; ऐसा करने से आपका मनोबल मजबूत रहेगा और आपको अपनी ताक़त एवं योग्यता
का दुबारा
ज्ञान हो जाएगा।
स्वयं से बार-बार सवाल पूछे - क्या आप आपने आप को इतना नीचा आंकते है ? की किसी के भी कुछ समझने और कहने पर आप अपने आप को कम, बुरा, बेकार मानने लग जाते है ? स्वयं से पूछे की किसी व्यक्ति
ने आपको ऐसा कैसे आँका ? क्या आपमे सच मे कोई सुधार की ज़रूरत है या यह उस व्यक्ति
का आपके प्रति नज़रिया
है? अगर सुधार की ज़रूरत है तो जल्द से जल्द इसके लिए कार्य करें और अगर यह किसी दूसरे का नज़रिया है तो अपने मन को इतना मजबूत करें की उसके नज़रिए
से आपका अस्तित्व कभी ना डगमगाए।
अंतिम बात यह ध्यान रखे कि यह जीवन बहुत अनमोल है और दूसरों
के विचारों को महत्व देते-देते आप अपने जीवन और स्वयं को कम ना आंके; आपको अपने प्रति सजग रहना होगा और अपने जीवन को ऊंचाइयों की तरफ ही लेते जाना होगा; ना की दूसरों
के विचारों
से अपने मन और मस्तिस्क को नकारात्मकता से भर लेना और अपने आप को बेकार और कम आँकने लगना।



Said it so correct... Everyone had face same problem..at the same time its very difficult to avoid..
ReplyDeleteThank you Shraddha
DeleteVery motivating writeup. Truly admirable!!💕👌👌
ReplyDeleteThank you Priya
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