बच्चों के जीवन में त्योहार का महत्व और उसके माध्यम से मिलने वाली सीख - Importance of festival in the lives of children and the learning that comes through it
बच्चों के जीवन में त्योहार का महत्व और उसके माध्यम से मिलने वाली सीख - Importance of festival
in the lives of children and the learning that comes through it
नमस्कार दोस्तों
!!!
त्योहारों
का मौसम शुरू हो गया हैं अब सिर्फ भारत मे ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे एक-एक कर अनेक प्रकार के पर्व मनाये जायेंगे। अभी गए 3 दिन पहले जब दीपावली आयी तो आप सभी ने अपने बच्चों को बड़े ही उत्साह मे देखा होगा; पूरे दिन धूम-धड़का, नाचना-गाना, खाना-पीना, पूरी सहभागिता से काम करना, रीति रस्मो को समझना इत्यादि….। कितना अनोखा लगता है ना बच्चों के इस उत्त्साह और उमंग को देख कर और क्यों नहीं लगेगा आखिर सभी त्योहारों की जान तो बच्चे ही होते हैं।
बच्चों का त्याहोरों से रिश्ता ही बहुत अनोखा होता हैं अगर आप स्वयं के बचपन को याद करें तो उसमें त्योहारों मे करे हुए मज़े का पृष्ठ सबसे दिलचस्प होगा; वह बहुत सारे रिश्तेदारों का घर आना, सभी चचेरे भाईओं-बहनों का पूरे दिन एक साथ मिल कर तरह-तरह के खेल खेलना, अलग-अलग पकवानों की सुगंध घर मे भर जाना, सबका मिलकर पूजा पाठ करना इत्यादि…..। यही सुन्दर यादों को बटोरने की अवस्था मे आज आपके स्वयं के बच्चे भी हैं; बचपना भी वही है त्यौहार भी वही हैं परन्तु कुछ स्थितियां दूसरी हैं।
आज कई माता पिता दोनों अलग-अलग प्रान्त, धर्म, जाती, परंपरा से होते हैं; ऐसे मे पर्वो को पूर्ण प्रकार से मानाने का साथ नहीं मिल पता और उसके ऊपर व्यस्थ जीवन होने पर समय का आभाव तो हमेशा रहता ही हैं; इसका सबसे ज्यादा नुकसान और किसी को नहीं बल्कि आपके बच्चों को होता हैं जो अपनी महत्वपूर्ण उम्र मे पर्वो का पूर्ण आनंद नहीं ले पाते एवं इसके महत्त्व से उनका बचपन अनजान रह जाता हैं। माता-पिता को यह पता नहीं चलता परन्तु परम्पराओं से अनजान रहने के कारण बच्चों मे सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ कमज़ोर हो जाती हैं और वह आगे खुद की संस्कृति से ज्यादा दूसरी संस्कृति को मूल्य देने लगते हैं।
आइये पहले समझे “क्यों पर्वों को मनाना बच्चों के लिए महत्वपूर्ण हैं ?” - Let us first understand “Why celebrating festivals is important for children’s?”
1) रिश्तों में मजबूत बंधन - Strong bond in relationships
त्योहारों मे सभी मिल कर एक साथ काम करते हैं और घूम घाम से जश्न मानते हैं; परिवार संयुक्त हो या एकल उस दिन सभी अपने दैनिक निर्धारित कार्यों को छोड़ कर घर पर ही रहते हैं और एक दूसरे का सभी कामों मे हाथ बंटाते हैं जिससे परिवार के सभी सदस्यों के आपस के रिश्ते मजबूत होते हैं।
पूरे साल बच्चों से घर के बुजुर्ग मिलने का इंतज़ार करते हैं और पर्वो का यह शुभ अवसर उनको यह मौका प्रदान करता हैं जहाँ वह उनसे अपने रिश्तों को मजबूत कर पाते हैं।
2) सामान्य दैनिक कार्यक्रम में बदलाव - Change from normal daily schedule
कोई भी रोज़ाना एक प्रकार की दिनचर्या से ऊब जाता हैं; बड़े ही क्या बच्चों को भी रोज़ की दिनचर्या से बदलाव की आवश्यकता होती हैं और त्योहार इसमें आपकी मदद करता हैं। पर्वो पर बच्चों को नए व्यंजन खाने को मिलते हैं, सबके आने से मन अच्छा रहता हैं, पाठशाला मे अवकाश होता हैं, नए परंपरागत पहनावा पहनते हैं एवं नयी परंपराओं और रस्मों के बारे मे जानने को मिलता हैं।
3) अन्य संस्कृति को स्वीकार करना और उसको मान देना - Accepting and recognizing other culture
आज ज्यादातर परिवारों मे बहु संस्कृति के लोग होते हैं; सभी सदस्यों के मुख्य त्योहारों को मनाने से बच्चों मे सभी संस्कृति की समझ पैदा होती हैं, वह सभी सम्प्रदायों कि महत्वता को समझ पाते हैं एवं उसका सम्मान करते हैं। सभी त्योहारों को मनाने से बच्चों मे खुले विचारों वाला व्यक्तित्व उत्त्पन होते हैं एवं आगे चल कर वह स्वयं एक बेहतर सामाजिक व्यक्ति बनते हैं।
4) जीवन के मूल्यों को समझने के लिए - To understand the values of life
भारत के सभी पर्व एवं दुनिया का हर एक त्योहार किसी ना किसी जीवन के मूल्यों से जुड़ा हुआ हैं और यही पर्व जब बच्चे मानते है तो वह माता-पिता एवं बुजुगों के द्वारा उसका मूल महत्व समझ लेते हैं। त्योहारों के मूल्यों की शिक्षा जीवन का स्तंब होती हैं एवं आगे चल कर यही शिक्षा बच्चों को जीवन की कठिनाइयों से लड़ने का बल प्रदान करती हैं।
5) रचनात्मकता मे बढ़ोतरी - Enhance creativity
बच्चे जब आपके साथ
Christmas Tree सजाते है, रंगोली बनाते हैं, पूजा की तैयारी कराते हैं, पकवान बनवाते हैं, फूलो की माला गूथते हैं, घर को सजाते हैं तो ना वह केवल आपकी मदद कर रहे होते हैं बल्कि इसके साथ-साथ उनकी रचनात्मकता मे भी बढ़ोतरी होती हैं। बच्चों मे चीज़ों की बेहतर समझ आती हैं एवं वह अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रयास करते हैं।
6) मिल जुलकर काम करने का कौशल - Teamwork Skills
त्योहारों पर इतना काम होता है की छोटे से बड़े सभी को एक दूसरे का हाथ बटाना पड़ता हैं; इस तरीके से काम जल्दी भी हो जाता हैं और बच्चों मे मिल जुलकर काम करने का कौशल भी उत्त्पन होता हैं एवं आगे चल कर उनमे अच्छे नेतृत्व की गुणवत्ता भी पैदा होती हैं।
आइये समझें समय के अभाव और अलग-अलग परंपरा के होते हुए भी बच्चों के साथ पर्वों को बेहतर तरीके से कैसे मनाये -
Let us understand how to celebrate the festivals with children in a better way despite lack of time and different traditions –
a) पूर्व नियोजन और पूर्व व्यवस्था करें; पर्व को ठीक प्रकार समझने और मनाने वाले रिश्तेदारों को निमंत्रण दे।
b) Internet की मदद से सारे नहीं पर कुछ महत्वपूर्ण व्यंजनों को बनाना सीख ले।
c) परमपरा के मुताबिक पूजा करने का पहले से सीख ले और उसके अनुसार तैयारी कर ले।
d) बच्चों को कहानियों के द्वारा उन त्यौहारों का महत्त्व बताये।
e) पूजा और तैयारी के समय के अनुसार अपने काम को समायोजित कर ले।
f) कभी-कभी बच्चों को त्यौहार मनाने के लिए रिश्तेदारों के घर ले जाये।
“जीवन स्वयं एक पर्व है और इसके त्यौहार बहुमूल्य धरोहर” हमारे पूर्वजों ने सोच समझ कर इन पर्वों को मनाने का समय और तरीका नियत किया; अब यह बीड़ा आपके ऊपर है की कैसे आप अपने मजबूत संस्कारों को अपनी आगे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचते हैं।इसी के साथ आज आपसे विदा लेती हूँ |
DeepTea







Nicely written....Truly agree.
ReplyDeleteThank you di 🙏
DeleteVery well said
ReplyDeleteThank you Shraddha 🙏
Delete👏🏻👍🏻
ReplyDeleteThank you Megha 🙏
DeleteWell said..👏👏
ReplyDeleteThank you Aditi 🙏
DeleteWell said deepaji.
ReplyDeleteThank you Lakshmi 🙏
DeleteVery Nice 👍
ReplyDeleteIndeed, this keeps them close to their roots. So nicely written.
ReplyDeleteThank you Subasini 🙏
Delete👌👌👍👍
ReplyDeleteThank you Priya 🙏
Deleteबहुत समझदार हो गई हो बेटा बहुत अच्छा लेख है
DeleteThank you Aunty Ji 🙏
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